बांदा, के एस दुबे । बुंदेलखंड का हृदय स्थल बाँदा इन दिनों भयंकर और जानलेवा लू की चपेट में है। पूरे देश में बाँदा लगातार पांचवें दिन भी सबसे गर्म जिला दर्ज किया गया है, जहाँ तापमान 47.6 डिग्री सेल्सियस के क्रूर आंकड़े को पार कर गया। इससे पहले बीते दिनों में यहाँ का पारा 48.2 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच चुका था। आसमान से बरसती आग और थार मरुस्थल से आ रही 40 से 60 किमी प्रति घंटे की रफ्तार वाली गर्म पछुआ हवाओं (लू) ने आम जनजीवन को पूरी तरह अस्त-व्यस्त कर दिया है। मौसम विभाग ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए जनपद में ‘रेड अलर्ट’ जारी रखा है। कृषि विश्वविद्यालय बाँदा के मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, बाँदा में इस रिकॉर्ड तोड़ गर्मी के पीछे कई स्थानीय और प्राकृतिक कारण हैं।कर्क रेखा के करीब होनारू भौगोलिक रूप से जिला कर्क रेखा के बेहद नजदीक है, जिससे सूर्य की किरणें सीधे जमीन पर पड़ रही हैं।जंगलों का भारी कटानरू पर्यावरण है। दोपहर 11 बजे से शाम 4 बजे के बीच मुख्य बाजारों और सड़कों पर पूरी तरह सन्नाटा पसर जाता है। लोग केवल बेहद जरूरी काम होने पर ही पूरे चेहरे और बदन को ढककर बाहर निकल रहे हैं। व्यापारिक गतिविधियां भी इस प्रचंड गर्मी के कारण बुरी तरह प्रभावित हुई हैं।
भीषण गर्मी और लू के कारण जिला अस्पताल और ट्रामा सेंटरों में मरीजों की संख्या में भारी उछाल आया है। डॉक्टरों के अनुसार, हर दिन सामान्य से 300-400 अधिक मरीज अस्पताल पहुंच रहे हैं, जिनमें अधिकांश उल्टी, दस्त, तेज बुखार, सिरदर्द और चक्कर आने (हीटस्ट्रोक) की समस्या से पीड़ित हैं। जिलाधिकारी अमित आसेरी ने बताया कि प्रशासन स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है।सरकारी अस्पतालों और एम्बुलेंस सेवाओं को 24 घंटे अलर्ट मोड पर रखा गया है। अस्पतालों में ओआरएस घोल, बेड, जरूरी दवाइयां और आईवी फ्लूइड्स की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित की गई है। आपूर्ति के लिए संबंधित अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए गए हैं। अस्पताल के वरिष्ठ चिकित्सकों ने आम जनता से अपील की है कि दोपहर के समय बेवजह घरों से बाहर न निकलें। यदि बाहर जाना जरूरी हो, तो छाता या सूती कपड़े का इस्तेमाल करें। खाली पेट बिल्कुल बाहर न जाएं और लगातार पानी, छाछ, नींबू पानी जैसे तरल पदार्थों का सेवन करते रहें।


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