चित्रकूट, सुखेन्द्र अग्रहरि : जानकीकुण्ड मार्ग में स्थित श्रीरामधाम बड़ा मंदिर में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के द्वितीय दिवस पर आचार्य अभिषेक शुक्ल ने कहा कि अभिमान से सृष्टि पतन होता है और विनय से सर्वसुख प्राप्त होते हैं, कामना से दुःख और संतोष से सर्वश्रेष्ठ सुख की प्राप्ति होती है। सदा सबके साथ विनय-नम्रता का बर्ताव करें, अभिमान का सर्वथा त्याग करें और सभी के साथ मधुर भाषा का करें। श्रीमद्भागवत कथा के द्वितीय दिवस पर कथा व्यास ने महाभारत का प्रसंग बताया कि भीष्म पितामहः ने युधिष्ठिर को उपदेशित करते हुए कहा कि जो व्यवहार स्वयं को अनुचित लगे। वह व्यवहार दूसरे के साथ कभी नहीं करना चाहिए। यही धर्म का सार है। जैसे स्वयं को सत्य, मान,
हित, प्रशंसा, आदि का व्यवहार प्रिय लगता है। वैसा ही व्यवहार दूसरे के साथ भी करना चाहिए। यदि किसी विरोधी व्यक्ति को भी अपने अनुकूल बनाना चाहते हैं। तो उसके प्रति सद्भावना रखें। इसके अलावा कथा व्यास ने राजा परीक्षित जन्म, शुकदेव आगमन आदि की कथा भी श्रवण करायी। इस अवसर पर कथा परीक्षित कृष्णदत्त दीक्षित, विमला दीक्षित, जगदीश त्रिवेदी, रामायणी, भरत दीक्षित, गोविंद दीक्षित, रामाघिदत्त मिश्रा सहित अन्य श्रद्धालु मौजूद रहे।
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