बांदा, के एस दुबे । बुंदेलखंड में भीषण गर्मी के बीच बांदा शहर की एक बड़ी आबादी इस समय बूंद-बूंद पानी के लिए तरस रही है, और जहाँ पानी आ भी रहा है, वहाँ जल संस्थान की घोर लापरवाही के चलते नलों से ज़हरीला और गंदा पानी उबल रहा है। शहर के अम्बेडकर नगर, डीएम कॉलोनी, कंचनपुरवा और क्योटरा सहित दर्जनों मोहल्लों में पिछले कई दिनों से दूषित जलापूर्ति हो रही है, जिससे स्थानीय नागरिकों में जल संस्थान के अधिकारियों के खिलाफ भारी आक्रोश व्याप्त है। हैरानी की बात यह है कि आम मोहल्लों को छोड़िए, खुद प्रशासनिक अधिकारियों की डीएम कॉलोनी और अम्बेडकर नगर जैसे पॉश व वीआईपी इलाकों में भी नलों से बदबूदार और मटमैला पानी सप्लाई किया जा रहा है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि पानी की स्थिति इतनी बदतर है कि इसे
पीना तो दूर, कपड़े धोना और नहाना भी मुमकिन नहीं है। भीषण गर्मी के इस मौसम में दूषित पानी के इस्तेमाल से उल्टी, दस्त, पीलिया और टाइफाइड जैसी जल-जनित बीमारियों के फैलने का खतरा तेजी से बढ़ गया है। स्थानीय समाजसेवियों और नागरिकों का आरोप है कि शहर के कई हिस्सों में पानी की पाइपलाइनें बेहद जर्जर हो चुकी हैं और नालियों के अंदर से होकर गुजरी हैं। कई जगहों पर लीकेज होने के कारण नालियों का गंदा और सीवर का पानी मिक्स होकर घरों की टंकियों तक पहुँच रहा है। इसके साथ ही वाटर फिल्टर प्लांट में पानी को साफ करने के लिए पर्याप्त मात्रा में फिटकरी या ब्लीचिंग पाउडर का इस्तेमाल न किए जाने और मुख्य टंकियों की समय पर सफाई न होने की शिकायतें भी सामने आ रही हैं।
स्थानीय नागरिकों का कहना हैरू ष्हम जल संस्थान को समय पर वाटर टैक्स देते हैं, लेकिन बदले में हमें नाली जैसा बदबूदार पानी दिया जा रहा है। कई बार अधिकारियों से शिकायत की गई, लेकिन उनके कान पर जूं तक नहीं रेंग रही। मजबूरी में लोगों को महंगे दामों पर पानी के जार खरीदने पड़ रहे हैं या दूर-दराज के हैंडपंपों से पानी ढोना पड़ रहा है। शहर वासियों का आरोप है कि जल संस्थान के जिम्मेदार अधिकारी और कर्मचारी शिकायतों को पूरी तरह से नजरअंदाज कर रहे हैं। बार-बार अवगत कराए जाने के बाद भी न तो लीकेज ठीक किए जा रहे हैं और न ही जलापूर्ति की गुणवत्ता में कोई सुधार देखने को मिल रहा है। आक्रोशित मोहल्ला वासियों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही शुद्ध पेयजल की व्यवस्था सुनिश्चित नहीं की गई, तो वे जल संस्थान कार्यालय का घेराव कर उग्र प्रदर्शन और आंदोलन करने को मजबूर होंगे।


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