चित्रकूट, सुखेन्द्र अग्रहरि । धर्म, आस्था और प्रकृति की आराधना के अद्वितीय संगम का दृश्य बुधवार को चित्रकूट में देखने को मिला, जब आषाढ़ मास की अमावस्या पर श्रद्धा का समंदर मंदाकिनी तट पर उमड़ पड़ा। अनुमान के अनुसार करीब 5 लाख श्रद्धालु पवित्र नदी मंदाकिनी में स्नान कर पुण्य लाभ प्राप्त करने पहुंचे। सुबह से ही घाटों पर हर-हर गंगे, जय कामतानाथ और राम नाम की गूंज के साथ आसमान भी श्रद्धा से भीग उठा। इस अवसर पर प्रशासन ने सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए थे। यातायात, चिकित्सा, जल व्यवस्था और पुलिस बल की तैनाती की गई थी, ताकि कहीं कोई अव्यवस्था न हो। श्रद्धालु स्नान के बाद कामतानाथ मंदिर में दर्शन-पूजन हेतु पहुंचे, जहां लंबी कतारों में घंटों
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| मेले मे रामघाट पर स्नान पर श्रद्धालु |
इंतजार कर भी उनके चेहरे पर भक्ति का तेज स्पष्ट दिखाई दे रहा था। कामदगिरि पर्वत की परिक्रमा करने वाले श्रद्धालु स्थानीय मान्यता के अनुसार यह विश्वास लेकर आते हैं कि यहां की परिक्रमा और मंदिर में पूजा मात्र से ही सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। यह वही पुण्य भूमि है, जहां भगवान श्रीराम ने अपने वनवास के समय निवास किया था। इस दिन का एक विशेष पहलू यह भी है कि किसान वर्ग इसे प्रकृति आराधना का पर्व मानकर अच्छी वर्षा और समृद्धि की कामना करते हैं। कई स्थानों पर किसानों ने खेतों की पहली जुताई इसी दिन से प्रारंभ की। आषाढ़ की अमावस्या मानो एक प्राकृतिक कलश है, जिसमें श्रद्धा, परंपरा, और उम्मीदें समाहित हैं।

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