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Tuesday, January 6, 2026

दो दिवसीय स्वर्ण प्राशन संस्कार शिविर का हुआ आयोजन

कानपुर, प्रदीप शर्मा - वरिष्ठ आयुर्वेदाचार्य डॉ. वंदना पाठक के निर्देशन में आरोग्य क्लीनिक लालबंगला स्वास्थ्य केंद्र सी.एस.जे.एम. यूनिवर्सिटी, कानपुर तथा राजकीय बाल गृह, कल्याणपुर, कानपुर में  दिवसीय निशुल्क स्वर्णप्राशन संस्कार शिविर का आयोजन किया गया जिसका समापन सोमवार को किया गया। इस अवसर पर नेशनल इंटीग्रेटेड मेडिकल एसोसिएशन महिला फोरम, कानपुर की सचिव आयुर्वेदाचार्य डॉ. वंदना पाठक द्वारा लगभग 130 बच्चों को निशुल्क स्वर्णप्राशन संस्कार कराया गया। शिविर के दौरान बच्चों एवं उनके अभिभावकों को शीत ऋतु में उचित आहार-विहार तथा आवश्यक सावधानियों के विषय में जानकारी दी गई।


डॉ. वंदना पाठक ने बताया कि शीत ऋतु में शरीर को गर्म, ऊर्जावान एवं रोगों से सुरक्षित रखने के लिए भोजन और दिनचर्या में विशेष ध्यान देना आवश्यक है। उन्होंने शीत ऋतु में उपयोगी आहार के बारे में बताते हुए कहा कि इस मौसम मेंगर्माहट देने वाले खाद्य पदार्थ सूप ,ऊर्जा प्रदान करने वाले आहार बादाम, काजू, अखरोट, मूंगफली, तिल, अलसी, गुड़, मक्का एवं बाजरे की रोटी रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने वाले पदार्थ नींबू, संतरा, आंवला, हल्दी वाला दूध, शहद

पाचन को सुदृढ़ रखने हेतु घी एवं हरी सब्ज़ियाँ जैसे पालक, मेथी, सरसों का साग आदि का सेवन करना चाहिए। उन्होंने बताया कि ठंड में प्यास कम लगने के बावजूद दिन में 6–8 गिलास पानी अवश्य पिएँ। शरीर को गर्म रखें, ठंडी हवा से बचें, सिर एवं पैरों को ढककर रखें।अत्यधिक तला-भुना एवं भारी भोजन न करें, चीनी के स्थान पर गुड़ एवं मेवों का प्रयोग करे। नियमित योग, हल्का व्यायाम करें तथा धूप में 15–20 मिनट अवश्य बैठें। उन्होंने बताया कि यह आयुर्वेद की एक महत्वपूर्ण विधा है, जो बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने, शारीरिक एवं मानसिक विकास में सहायक है। यह भारतीय संस्कृति में प्रचलित 16 संस्कारों में से एक प्रमुख संस्कार है। जिन बच्चों में यह संस्कार नियमित रूप से किया जाता है, उनमें मौसम एवं वातावरण के कारण होने वाली बीमारियाँ अपेक्षाकृत कम पाई जाती हैं।

स्वर्णप्राशन में प्रयुक्त औषधि स्वर्ण भस्म, वच, गिलोय, ब्राह्मी, गौघृत एवं मधु आदि द्रव्यों के समन्वय से तैयार की जाती है। उन्होंने यह भी बताया कि बच्चों को डाँटना या पीटना उनके मानसिक स्वास्थ्य एवं रोग प्रतिरोधक क्षमता पर नकारात्मक प्रभाव डालता है, अतः बच्चों का स्नेहपूर्ण एवं सकारात्मक लालन-पालन किया जाना चाहिए।

इस अवसर पर राजकीय बाल गृह की शिक्षिका सुमन तथा स्वास्थ्य केंद्र की सिस्टर ऊषा सहित अन्य लोग मौजूद रहे।

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