Pages

Monday, January 5, 2026

मेडिकल कॉलेज में हाइपोस्पेडियस का हुआ सफल ऑपरेशन

ऑपरेशन प्रक्रिया में लगा ढाई से तीन घंटे का समय

बांदा, के एस दुबे । कभी-कभी कूदरत कुछ कार्य अधूरे छोड़ देती है, जिसे डाक्टर पूरा कर देते हैं। शायद इसी लिए डाक्टर को भगवान का रूप कहा जाता है। ऐसा ही एक मामला रानी दुर्गावती मेडिकल कॉलेज में देखने को मिला। रानी दुर्गावती मेडिकल कॉलेज के सर्जरी विभाग में कार्यरत यूरो सर्जन डाक्टर सोमेश त्रिपाठी ने कूदरत के द्वारा अधूरे छोड़े गए कार्य को पूरा करके चिकित्सीय व्यवस्था को ऊंचाइयों पर पहुंचा दिया। आपको बता दें कि बाँदा के तिंदवारी के बेंदा के रहने वाले आठ वर्सीय सूरज पुत्र लक्ष्मी शरण को जन्म से ही पेशाब करने में दिक्कत

ऑपरेशन करते हुए डॉक्टर।

थी सूरज के पेशाब की नली आधी बनी हुई थी आधा रास्ता पूरी तरह बंद था जिसकी वजह से आधे रास्ते में ही छेद हो गया था जिससे सूरज सही से यूरिन पास नहीं कर पाता था। सूरज के पिता ने बताया कि उन्होंने सूरज का कई नामी गिरामी अस्पतालों में इलाज करवाया लेकिन कोई लाभ नहीं मिला, तब सूरज के पिता सूरज को लेकर रानी दुर्गावती मेडिकल कॉलेज पहुंचे जहाँ डाक्टर सोमेश त्रिपाठी ने मरीज को देखने के बाद ऑपरेशन की सलाह दी परिजन की अनुमति के बाद पिछले हफ्ते डाक्टर सोमेश ने सूरज का सफल ऑपरेशन करके पेशाब की आधी बनी नली को पूरी बना दी जिससे सूरज को नॉर्मल तरीके से पेशाब होने लगी। कुछ समय मरीज को भर्ती रखने के बाद शनिवार को मरीज की छुट्टी कर दी गई। डाक्टर सोमेश त्रिपाठी ने बताया कि सूरज के जन्म से ही पेशाब नली आधी बनी हुई थी जिससे मरीज को पेशाब नॉर्मल जगह से नहीं होती थी बल्कि नीचे से होती थी एवं लिंग में टेढ़ा पन बना हुआ था, जिससे मरीज को पेशाब की थैली एवं गुर्दे खराब होने की सम्भवना बनी हुई थी और मरीज का आधा लिंग काम नहीं कर रहा था,इस बीमारी को हाइपोस्पेडियस कहते हैं (मूत्र का छिद्र निचली सतह पर होना) डाक्टर ने बताया कि समय रहते मरीज हमारे पास आ गया,और उसका इलाज हो गया, ऑपरेशन के बारे में डाक्टर सोमेश ने बताया कि मरीज के आधी नली बनी थी आधी नली हमने सर्जरी करके मरीज के लिंग की मांसपेशियों से बना दी जिससे मरीज को नॉर्मल पेशाब होने लगी साथ ही मरीज का पूरा लिंग काम करने लगा, आगे उसका ग्रहस्त जीवन भी सुरक्षित हो गया। डाक्टर सोमेश त्रिपाठी ने बताया कि इस ऑपरेशन में लगभग ढाई से तीन घण्टे लगे इस ऑपरेशन में मामूली सरकारी खर्च ही लगा है अगर ये ऑपरेशन प्राइवेट में होता तो इसका खर्च लगभग डेढ़ से दो लाख लग जाता। इस ऑपरेशन में डाक्टर सोमेश त्रिपाठी यूरो सर्जन के साथ डाक्टर खुर्शीद अहमद जे आर, डाक्टर प्रिया दीक्षित, डाक्टर पंकज, ओटी स्टाफ में आशीष हसन उमा आदि शामिल रहे।


No comments:

Post a Comment