मर्यादा का महासागर व त्याग का शिखर है भरत चरित्र - Amja Bharat

Amja Bharat

All Media and Journalist Association

Breaking

Tuesday, March 17, 2026

मर्यादा का महासागर व त्याग का शिखर है भरत चरित्र

सजल हो उठीं पण्डाल में उपस्थित श्रद्धालुओं की आंखे

फतेहपुर,  मो शमशाद । शहर के ज्वालागंज स्थित रामलीला मैदान में प्रवाहित हो रही श्रीराम कथा के पावन अवसर पर आज भरत चरित्र के प्रसंग ने भक्तों के हृदय को झकझोर दिया। कथा व्यास परम श्रद्धेय चंदन कृष्ण जी महाराज ने राजकुमार भरत के अलौकिक त्याग और भ्रातृ प्रेम का ऐसा सजीव वर्णन किया कि पण्डाल में उपस्थित हजारों श्रद्धालुओं की आँखें सजल हो उठीं। कथा के मुख्य प्रसंगों की व्याख्या करते हुए पूज्य व्यास जी ने कहा कि भरत का चरित्र त्याग की वह पराकाष्ठा है, जहाँ अयोध्या का निष्कंटक राज्य भी उनके चरणों की धूल के समान था। उन्होंने कहा कि भरत के समान भाई न संसार में हुआ है और न होगा। उन्होंने न केवल राज्य का परित्याग किया, बल्कि 14 वर्षों तक नंदीग्राम की कुटिया में रहकर साक्षात तपस्या का जीवन जीया। भरत जी द्वारा प्रभु राम की

कथा के दौरान पूजा-अर्चना करते श्रद्धालु।

चरण पादुकाओं को सिर पर रखकर अयोध्या लाना, सत्ता के प्रति उनके अनासक्ति भाव को दर्शाता है। वे राजा नहीं, राम के सेवक बनकर जिए। कैकेयी के वरदान को ठुकराकर भरत ने सिद्ध किया कि अधर्म से प्राप्त वैभव कभी सुखकारी नहीं होता। भव्य आरती में कथा संयोजक प्रदेश अध्यक्ष उत्तम उद्योग व्यापार मंडल कृष्ण कुमार तिवारी एवं अन्य गणमान्य अतिथियों ने सम्मिलित होकर प्रभु का आशीर्वाद लिया। फूलों की वर्षा और शंखनाद के बीच पाण्डाल भक्तिमय वातावरण में सराबोर रहा। कथा स्थल पर धनंजय मिश्रा, मनोज साहू, आकाश भदौरिया, जय किशन, अनिल महाजन, श्रवण दीक्षित, प्रेमदत्त उमराव, संदीप श्रीवास्तव, संजय सिंह, सौरभ गुप्ता, सोनू शुक्ला, गंगासागर, गंगाशरण करवरिया, शिवप्रसाद मामा, शनि, अतुल कसेरा उपस्थित रहे। 


No comments:

Post a Comment

Post Bottom Ad

Pages