पसीने की कीमत कब बढ़ाएगा सिस्टम
प्रबंधन की हितैषी छवि पर सवाल
चित्रकूट, सुखेन्द्र अग्रहरि । उत्तर प्रदेश परिवहन निगम की कार्यशालाओं में वर्षों से पसीना बहा रहे बाह्य स्रोत तकनीकी कर्मियों की आवाज अब तेज होती दिख रही है। आईटीआई, डिप्लोमा और कौशल विकास से प्रशिक्षित ये कर्मचारी, जिन्हें अकुशल, अर्द्धकुशल और कुशल श्रेणियों में बांटकर 7,800 से 13,565 रुपये तक की पुरानी दरों पर काम कराया जा रहा है, अब संशोधित न्यूनतम मजदूरी की मांग को लेकर मुखर हो उठे हैं। हाल ही में श्रम विभाग की अधिसूचना (17 अप्रैल 2026) ने प्रदेश के विभिन्न श्रेणी के जिलों में मजदूरी दरों को बढ़ाते हुए नई आर्थिक हकीकत का आईना दिखा दिया है- जहां कुशल श्रमिकों की मजदूरी 15,000 से 16,000 रुपये के पार पहुंच
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| उत्तर प्रदेश रोडवेज कर्मचारी संघ के क्षेत्रीय मंत्री पवन कुमार गुप्ता |
रही है। ऐसे में परिवहन निगम की कार्यशालाओं में काम कर रहे तकनीकी कर्मियों का पुराना भुगतान अब सवालों के घेरे में है। उत्तर प्रदेश रोडवेज कर्मचारी संघ के क्षेत्रीय मंत्री पवन कुमार गुप्ता ने प्रबंधन को पत्र लिखकर स्पष्ट किया है कि बढ़ती महंगाई के दौर में इन श्रमिकों का वर्तमान वेतन उनके परिवार के भरण-पोषण के लिए अपर्याप्त है। उन्होंने शासनादेश के अनुरूप वेतन संशोधन की मांग करते हुए प्रबंधन की श्रमिक हितैषी छवि की कसौटी भी सामने रख दी है। अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि निगम प्रबंधन इन मेहनतकश हाथों को राहत देता है या फिर फाइलों में ही उनकी उम्मीदें दम तोड़ती रहेंगी।
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