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Sunday, April 26, 2026

एक दिवसीय निःशुल्क स्वर्णप्राशन संस्कार शिविर का एक दिवसीय निःशुल्क स्वर्णप्राशन संस्कार शिविर का आयोजन आयोजन

कानपुर, प्रदीप शर्मा - वरिष्ठ आयुर्वेदाचार्य डॉ. वंदना पाठक के निर्देशन में एक दिवसीय निःशुल्क स्वर्णप्राशन संस्कार शिविर का आयोजन आरोग्य क्लिनिक, सी.एस.जे.एम. यूनिवर्सिटी स्वास्थ्य केंद्र , राजकीय बाल गृह कल्याणपुर एवं राजकीय बालिका गृह स्वरूप नगर में सफलतापूर्वक किया गया। इस अवसर पर नेशनल इंटीग्रेटेड मेडिकल एसोसिएशन महिला फोरम, कानपुर की सचिव आयुर्वेदाचार्य डॉ. वंदना पाठक द्वारा लगभग 130 बच्चों को निःशुल्क स्वर्णप्राशन संस्कार कराया गया। शिविर के दौरान बच्चों एवं उनके अभिभावकों को ग्रीष्म ऋतु के आगमन पर  उचित आहार-विहार एवं आवश्यक सावधानियों के विषय में विस्तारपूर्वक जानकारी प्रदान की गई।


स्वर्णप्राशन संस्कार के महत्व पर प्रकाश डालते हुए डॉ. पाठक ने बताया कि यह आयुर्वेद की एक महत्वपूर्ण विधा है, जो बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने तथा उनके शारीरिक एवं मानसिक विकास में सहायक है। यह भारतीय परंपरा में वर्णित 16 संस्कारों में से एक प्रमुख संस्कार है। नियमित रूप से स्वर्णप्राशन कराने वाले बच्चों में ऋतु परिवर्तन एवं वातावरण जनित रोग अपेक्षाकृत कम देखे जाते हैं। उन्होंने बताया कि स्वर्णप्राशन में प्रयुक्त औषधि स्वर्ण भस्म, वच, गिलोय, ब्राह्मी, गौघृत एवं मधु आदि द्रव्यों के समन्वय से तैयार की जाती है। उन्होंने  कहा कि बच्चों को डांटना या शारीरिक दंड देना उनके मानसिक स्वास्थ्य एवं रोग प्रतिरोधक क्षमता पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकता है, अतः बच्चों का स्नेहपूर्ण एवं सकारात्मक वातावरण में लालन-पालन अत्यंत आवश्यक है।

उन्होंने कहा कि अत्यधिक तैलीय और मसालेदार भोजन से बचना चाहिए तथा ताजे फल और हरी सब्जियों को आहार में शामिल करना चाहिए।  बच्चों, बुजुर्गों और बीमार व्यक्तियों का विशेष ध्यान रखना चाहिए, क्योंकि वे गर्मी के प्रभाव के प्रति अधिक संवेदनशील होते हैं। इन सावधानियों को अपनाकर ग्रीष्म ऋतु के दुष्प्रभावों से काफी हद तक बचा जा सकता है और इस मौसम को सुरक्षित व स्वस्थ तरीके से बिताया जा सकता है। इस समय सबसे महत्वपूर्ण है शरीर में पानी की कमी (डिहाइड्रेशन) से बचाव। दिन भर में पर्याप्त मात्रा में पानी पीना चाहिए, भले ही प्यास न लगे। बाहर निकलते समय पानी की बोतल साथ रखना एक अच्छी आदत है। साथ ही, तेज धूप में अधिक समय तक रहने से बचना चाहिए और हल्के, सूती कपड़े पहनने चाहिए। इस अवसर पर क्लिनिकल साइकोलोजी की डॉ वास्वी, डॉ सावनी, डॉ सीजल डॉ अनुराग, नीरज पाठक राजकीय बाल गृह की शिक्षिका सुमन, राजकीय बाल गृह (बालिका)की शिक्षिका संगीता सचान ,स्वास्थ्य केंद्र की सिस्टर ऊषा तथा आरोग्य क्लिनिक, लालबंगला के धर्मेंद्र, सावित्री, निशा एवं शेखर सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।

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