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Wednesday, May 6, 2026

यूपी के 22 जिलों में बेहतर उत्पादकता हेतु हुआ कार्यशाला का आयोजन

कानपुर, प्रदीप शर्मा - आईसीएआर अटारी कानपुर एवं भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (आईएआरआई), नई दिल्ली के संयुक्त तत्वावधान में अटारी, कानपुर के सभागार में “फर्मेंटेड ऑर्गेनिक मैन्योर परियोजना” पर बुधवार को एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला के उद्घाटन सत्र में अटारी के निदेशक डॉ. राघवेंद्र सिंह ने बताया कि यह एक नई परियोजना सीएसआर मारुति द्वारा फण्डेड है। उन्होंने बताया कि इस परियोजन का मुख्य उद्देश्य सी.वी.जी. फैक्ट्री से उत्पन्न बाई प्रोडक्ट फरमेन्टेड जैविक खादों के उपयोग एवं प्रसार से कृषि उत्पादन बढ़ाना, मृदा की उपजाऊ शक्ति बढ़ाना एवं पर्यावरणीय दुष्प्रभावों को कम करना है। उत्तर प्रदेश में इस परियोजना के संचालन के लिए 22 जिलों का चयन किया गया है। इस कार्यशाला के माध्यम से कृषि विज्ञान केन्द्रों के वैज्ञानिकों को इस परियोजना को संचालित करने हेतु जानकारी दी गई। इस परियोजना के क्रियान्वयन से


देश के राष्ट्रीय कार्यक्रम संतुलित उर्वरकों के प्रयोग को भी बल मिलेगा। आईएआरआई के सस्य विज्ञान प्रभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. एस.एस. राठौर ने बताया कि फर्मेंटेड ऑर्गेनिक मैन्योर पारंपरिक जैविक खाद की तुलना में अधिक प्रभावशाली है और इसमें पोषक तत्वों की उपलब्धता अधिक होती है। इस तकनीक को अपनाकर किसान रसायनिक उर्वरकों पर अपनी निर्भरता कम कर सकते हैं, जिससे खेती की लागत में कमी आएगी और दीर्घकालिक मृदा स्वास्थ्य सुनिश्चित होगा।आईएआरआई के प्रधान वैज्ञानिक डॉ. राजीव कुमार सिंह ने इस परियोजना के मुख्य उद्देश्यों के बारे में बताया। उन्होंने बताया कि चयनित 22 जिलों में कृषि विज्ञान केंद्रों के माध्यम से किसानों तक प्रक्षेत्र प्रदर्शनों, प्रशिक्षण, किसान गोष्ठी, कृषि मेला आदि माध्यमों से फर्मेंटेड ऑर्गेनिक मैन्योर का प्रचार-प्रसार किया जाएगा। इस अवसर विशिष्ट अतिथियों सीएसए के निदेशक प्रसार डॉ. वी. के. त्रिपाठी और कृषि विवि.अयोध्या के निदेशक प्रसार डॉ. आर.बी. सिंह ने भी अपने विचार रखे और कृषि उत्पादकता में स्थिरता लाने के लिए वैज्ञानिकों के दृष्टिकोण और कार्यान्वयन रणनीतियों को साझा किया। तकनीकी सत्रों में प्रसतुतिकरण के माध्यम से आएआरआई के वैज्ञानिकों द्वारा परियोजना की जानकारी कार्याशाला में उपस्थित उत्तर प्रदेश के 22 कृषि विज्ञान केंद्रों के वैज्ञानिकों को दी गई। कार्यक्रम के अन्त में डा. अजय कुमार सिंह, प्रधान वैज्ञानिक द्वारा धन्यवाद ज्ञापन किया गया।

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