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Sunday, May 3, 2026

800 मेगावाट का सपना या फाइलों में कैद उजाला? चित्रकूट सोलर पार्क पर सवालों की तपिश

कागजों में चमक, जमीन पर अंधेरा 

सोलर पार्क में अतिक्रमण व विवादों का जाल 

चित्रकूट,  सुखेन्द्र अग्रहरि। 800 मेगावाट सोलर पार्क- जिसे जिले के विकास की नई रोशनी कहा जा रहा था- अब प्रशासनिक पेचों और जमीनी उलझनों में उलझता नजर आ रहा है। शनिवार को जिलाधिकारी पुलकित गर्ग की बैठक में सामने आया कि सीमांकन की प्रक्रिया लेखपालों और राजस्व अधिकारियों की कमी से धीमी पड़ी है, जबकि पारिवारिक भूमि विवादों के कारण एसडीएम अदालतों में लंबित मामलों ने कई भूखंडों के पट्टे अटका दिए हैं। खरगदाह गांव में 296.296 एकड़ सरकारी भूमि का हस्तांतरण नक्शा-तर्मिम के अभाव में ठप है। उधर, दोदियामाफी और सेमारा में सर्वेक्षित भूमि पर अतिक्रमण के बावजूद कार्रवाई कागजों तक सीमित है, जबकि गैर-सर्वेक्षित भूमि पर

सोलर पार्क पर समीक्षा बैठक लेते डीएम

भी कई एकड़ कब्जे की आशंका जताई गई है। वन विभाग द्वारा सेमरा में 11.75 एकड़ भूमि पर वृक्षारोपण ने एक और पेच पैदा कर दिया है। परियोजना के बाहर पट्टे पर दी गई भूमि और बाहर छूटे गांव भी विकास की इस कहानी में सवाल खड़े कर रहे हैं। जिलाधिकारी ने मऊ एसडीएम को तेजी लाने के निर्देश दिए हैं, लेकिन बड़ा सवाल यही है- क्या चित्रकूट का सोलर सपना फाइलों की धूल झाड़ पाएगा या यूं ही कागजी उजाले में दम तोड़ देगा?

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