16 जुलाई को सूर्य देव मिथुन राशि से निकलकर कर्क राशि में रात्रि 11:45 पर प्रवेश करेंगे इसके साथ ही सूर्य का 'दक्षिणायन' (दक्षिण की ओर गमन) शुरू हो जाता है इस दिन से छह महीने के उत्तरायण काल का अंत होता है और दक्षिणायन की शुरुआत होती है, इस दिन से देवताओं की रात शुरू हो जाती है। सूर्य के दक्षिण गोलार्ध की ओर झुकाव के कारण उत्तरी गोलार्ध में दिन छोटे और रातें लंबी होने लगती हैं. इसे सावन या श्रावण संक्रांति भी कहा जाता है。इस दिन भगवान विष्णु और भगवान शिव की पूजा का विशेष विधान है मकर संक्रांति की तरह ही, कर्क संक्रांति के दिन पवित्र नदियों में स्नान, ध्यान और जरूरतमंदों को दान करने का अत्यधिक महत्व माना जाता है कर्क संक्रांति
पर सूर्य देव की उपासना करना अत्यधिक कल्याणकारी माना जाता है।सूर्य देव को प्रकृति के कारक के तौर पर जाना जाता है इस दिन पुण्यकाल पूजा-पाठ और दान के लिए शुभ समय दोपहर 12:27 मिनट पर शुरू होगा और शाम को 07:21 मिनट तक रहेगा कर्क संक्रांति पर अनाज, गेहूं, गुड़, तांबे के बर्तन, वस्त्र, फल, तिल, छाता, धन आदि का दान कर सकते है पितरों के निमित्त तर्पण और श्राद्ध करने से उन्हें मोक्ष की प्राप्ति होती है और परिवार को पितृदोष से मुक्ति मिलती है. सूर्य देव को जल चढ़ाने और दान करने से घर में सुख, समृद्धि और अच्छी ऊर्जा आती है -
- ज्योतिषाचार्य एस.एस. नागपाल स्वास्तिक ज्योतिष केन्द्र, अलीगंज, लखनऊ

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