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Saturday, September 12, 2026

गणेश चतुर्थी महोत्सव 14 सितम्बर से

 भाद्रपद के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को गणपति की स्थापना की जाती है. भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी को अग्रपूज्य देव भगवान् गणेश का मध्याह्न में जन्म हुआ था। 10 दिन तक मनाए जाने वाला गणेश उत्सव इस साल भाद्रपद मास के शुक्ल की चतुर्थी की शुरुआत, 14 सितंबर को प्रात: 07:06  से होगी और 15 सितंबर को प्रात: 07:06  पर समाप्त हो जाएगी। उदया तिथि के अनुसार, गणेश चतुर्थी पर्व 14  सितंबर के दिन से मनाया जाएगा। गणेश चतुर्थी के दिन मध्याह्न पूजा मुहूर्त सुबह 10:48  बजे से दोपहर 01 बजकर 16 मिनट के बीच उत्तम रहेगा। वहीं इस विशेष दिन पर रवि योग का निर्माण हो रहा है जो दोपहर 01:55 से 15 सितंबर को प्रात: 05 :52 तक रहेगा। इसके साथ इस दिन चित्रा नक्षत्र का निर्माण हो रहा है जो दोपहर 01:55 तक रहेगा फिर स्वाति नक्षत्र शुरू हो


जायेगा, ब्रह्म योग दोपहर 12:47 तक रहेगा फिर इन्द्र योग प्रारम्भ हो जायेगा।  भगवान् गणेश विघ्नहर्ता हैं। गणेशजी बुद्धि के देवता हैं। ऋद्धि और सिद्धि इनकी धर्मपत्नियाँ हैं। इनका वाहन मूषक है इस प्रकार भगवान् गणेश की उपासना से जहाँ कार्यों में सफलता मिलती है, अवरोध हटते हैं, वहीं ज्ञान एवं बुद्धि में वृद्धि होती है तथा ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है

 मान्यता है कि भाद्रपद के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी से इस माह की चतुदर्शी तिथि तक यानी कि 10 दिनों तक भगवान गणेश पृथ्वी पर वास करते हैं. गणेश चतुर्थी पर जगह-जगह पंडाल और घरों में गणेश को स्थापित किया जाता है. कहते हैं कि जो व्यक्ति इन दिनों में गणेश जी को घर में बैठाकर सच्चे मन से उनकी आराधना करता है उसके जीवन से तनाव खत्म हो जाता है. सुख-समृद्धि आती है  गणेश चतुर्थी के दिन गणेश प्रतिमा पर सिन्दूर चढ़ाना चाहिए  तथा मोदक/ लडू  का भोग लगाना चाहिए। महाराष्ट्र में गणेश चतुर्थी महोत्सव 10 दिन तक बहुत धूमधाम से  मनाया जाता है ।
चतुर्थी तिथि के  दिन चन्द्र दर्शन मना है। चन्द्र दर्शन करने पर कोई मिथ्या कलंक लग सकता है अगर कोई भूलवश चन्द्र दर्शन कर लेता है तो उसे श्रीमद् भागवत के 10वें स्कन्ध 56ः57 अध्याय में उल्लेखित स्यमंतक मणि की चोरी की कथा का श्रवण करना लाभ कारक है

-ज्योतिषाचार्य-एस.एस.नागपाल, स्वास्तिक ज्योतिष केन्द्र, अलीगंज, लखनऊ

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