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Monday, September 21, 2026

यूजीसी नियमों और आरक्षण व्यवस्था के खिलाफ ज्ञापन, सत्ता के रोल बैक की चेतावनी

बांदा, के एस दुबे । विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के वर्तमान नियमों, आरक्षण व्यवस्था में सुधार, तथा सामान्य वर्ग के आर्थिक व सामाजिक रूप से कमजोर नागरिकों के अधिकारों की रक्षा को लेकर सोमवार को नरैनी तहसील में व्यापक विरोध प्रदर्शन किया गया। सवर्ण समाज एवं युवाओं द्वारा उपजिलाधिकारी नरैनी के माध्यम से महामहिम राष्ट्रपति के नाम एक 6-सूत्रीय ज्ञापन सौंपा गया। ज्ञापन के दौरान वक्ताओं ने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि सरकार युवाओं और विद्यार्थियों के भविष्य को प्रभावित करने वाले नियमों में संशोधन नहीं करती है, तो उग्र आंदोलन किया जाएगा।  उच्च शिक्षा से जुड़े विवादित प्रावधानों को तत्काल वापस लेने या संशोधित करने की मांग, ताकि विद्यार्थियों और शैक्षणिक संस्थानों के भविष्य पर कोई विपरीत असर न पड़े।कानून के दुरुपयोग को रोकने और झूठी शिकायत प्रमाणित होने पर दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की व्यवस्था की मांग। आरक्षण व्यवस्था में


आय, संपत्ति, शैक्षणिक स्थिति और वास्तविक आवश्यकता को मानक बनाने की मांग। आरक्षण का लाभ ले चुके परिवारों के सामाजिक-आर्थिक स्तर का समय-समय पर तथ्यात्मक मूल्यांकन करने की मांग, जिससे लाभ वास्तविक जरूरतमंदों तक पहुंचे। सामान्य वर्ग के कमजोर नागरिकों की शिक्षा, फीस, छात्रवृत्ति और रोजगार संबंधी समस्याओं के समाधान हेतु श्सवर्ण आयोगश् या समान अवसर आयोग का गठन। समाज के हर वर्ग के लिए समान विधिक सुरक्षा और संवैधानिक अधिकारों की गारंटी। यदि सरकार यूजीसी के इन नियमों को रोल बैक नहीं करती है, तो हम सरकार को रोल बैक करेंगे। यह लड़ाई किसी एक वर्ग की नहीं, बल्कि देश के विद्यार्थियों और युवाओं के भविष्य से जुड़ा सवाल है। सरकार को जनभावनाओं का सम्मान करना ही होगा। हमारी लड़ाई किसी के अधिकार छीनने की नहीं, बल्कि सभी नागरिकों के लिए न्यायपूर्ण और समान अवसर सुनिश्चित करने की है। हम लोकतांत्रिक और संवैधानिक तरीके से अपनी मांगों को लगातार उठाते रहेंगे।

ज्ञापन कार्यक्रम में क्षेत्र के युवाओं और वरिष्ठ नागरिकों की भारी उपस्थिति रही। इस दौरान मुख्य रूप से उमेश तिवारी, सोनू करवरिया, प्रदीप करवरिया, आदित्य प्रताप सिंह, आनंद पांडेय, रोहित पाठक, जीतू त्रिपाठी, कामता प्रसाद मिश्रा, जागेश्वर प्रसाद पांडेय, पप्पू करवरिया समेत सैकड़ों लोग उपस्थित रहे। प्रतिनिधियों का कहना है कि यह पूरी प्रक्रिया पूरी तरह से संवैधानिक और लोकतांत्रिक मर्यादा के तहत की गई है और उन्हें उम्मीद है कि राष्ट्रपति भवन व केंद्र सरकार इन मांगों पर गंभीरता से विचार करेगी।


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