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Monday, June 23, 2025

जगन्नाथ रथ यात्रा 27 जून को

आषाढ़ शुक्ल पक्ष में द्वितीया तिथि को सम्पूर्ण भारत में  रथयात्रां उत्सव मनाया जाता है। इस वर्ष जगन्नाथ रथ यात्रा 27 जून को होगी द्वितीया तिथि 26 जून को दोपहर 1:24 बजे शुरू होगी और 27 जून को सुबह 11:19 बजे समाप्त होगी। उदयातिथि के आधार पर यह पर्व 27 जून को मनाया जाएगा। शुक्रवार का दिन मां लक्ष्मी को समर्पित है, जो समृद्धि और वैभव की देवी हैं। यह यात्रा नौ दिनों तक चलती है और 5 जुलाई को समाप्त होगी। 27 जून को प्रात: 07: 22 तक सवार्थ सिद्धि  योग एवं पुनर्वसु नक्षत्र रहेगा उसके उपरांत पुष्य नक्षत्र रहेगा चन्द्रमा कर्क राशि में रहेंगे। पुरी जगन्नाथ मंदिर भारत के चार पवित्र धामों में से एक है. वर्त्तमान मंदिर 800 वर्ष से अधिक प्राचीन है पुरी की रथ यात्रा विश्व प्रसिद्व है पुरी रथयात्रा के लिए बलराम, श्रीकृष्ण और देवी सुभद्रा के लिए तीन अलग-अलग रथ बनाए जाते है. रथयात्रा में सबसे आगे बलरामजी का रथ, उसके बाद बीच में देवी सुभद्रा का रथ और सबसे पीछे भगवान जगन्नाथ श्रीकृष्ण का रथ होता है  भगवान बलराम का रथ को तालध्वज, देवी सुभद्रा का रथ को पद्मध्वज, भगवान


जगन्नाथ के रथ को गरुड़ध्वज /नंदीघोष कहते है ये रथ लकड़ी से बनाए जाते हैं और इनमें कील या कांटे का उपयोग नहीं किया जाता। भगवान को श्रद्धापूर्वक रथ पर विराजमान करके नगर में भ्रमण करवाया जाता है।  रथयात्रा जगन्नाथ मन्दिर से आरम्भ होकर गुण्डिचा मन्दिर तक पहुँचती है। रथयात्रा की यह परम्परा राजा इन्द्रद्युम के शासनकाल से ही चली आ रही है। पुरी का रथोत्सव 10 दिन तक मनाया जाता है। द्वितीया से नवमी तक भगवान् गुण्डिचा मन्दिर में ही विश्राम करते हैं।  गुण्डिचा स्थान पर ही विश्वकर्मा जी ने भगवान् जगन्नाथ, बलराम एवं सुभद्रा जी के विग्रहों का निर्माण किया था। इसी कारण गुण्डिचा स्थान को भगवान् का जन्मस्थान माना जाता है और भगवान् अपनी इच्छा से ही वर्ष में एक बार अपने जन्मस्थान की यात्रा करते हैं। आषाढ़ शुक्ल दशमी के दिन भगवान् गुण्डिचा मन्दिर से रथ द्वारा ही अपने वर्तमान मन्दिर के लिए यात्रा करते हैं। ऐसा माना जाता है कि भगवान् में के गुण्डिचा धाम में  निवास के दौरान वहाँ सभी तीर्थ वहाँ उपस्थित होते हैं। यदि  कोई व्यक्ति इस दौरान वहाँ रहकर स्नान करे और भगवान् के दर्शन कर पूजा अर्चना करे, रथ यात्रा के दौरान, रथ को खींचने का पुण्य प्राप्त करते हैं , उसे सभी तीर्थों के लाभ मिल जाते हैं। उसे धर्म, अर्थ, काम और  मोक्ष चारों पुरुषार्थों की प्राप्ति हो जाती है और पूर्व जन्म के पापों से मुक्ति मिलती है। रथ खींचने का संकल्प लेना भी विशेष पुण्यदायक होगा 

- ज्योतिषाचार्य एस.एस. नागपाल स्वास्तिक ज्योतिष केन्द्र, अलीगंज, लखनऊ


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