कथा नहीं, संस्कृति का महायज्ञ
कथा बनी चेतना की चिंगारी
चित्रकूट, सुखेन्द्र अग्रहरि । चित्रकूट की पुण्यभूमि एक बार फिर रामनाम के जयकारों से गूंज उठी है। धर्म, भक्ति और सामाजिक समरसता की त्रिवेणी इन दिनों श्रीधर धाम, सती अनुसूया क्षेत्र में प्रवाहित हो रही है, जहां दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान प्रयागराज शाखा के तत्वावधान में 24 से 30 जून तक भव्य श्रीरामकथा का आयोजन किया जा रहा है। कार्यक्रम का शुभारंभ मंगल कलश यात्रा से हुआ, जिसमें सैकड़ों श्रद्धालु महिलाओं ने सिर पर कलश लिए, बैंड.बाजों की मधुर धुनों के साथ नगर भ्रमण किया। जय श्रीराम के उद्घोष से संपूर्ण क्षेत्र भक्तिमय हो उठा। यात्रा का समापन कथा स्थल पर हुआ, जहां पहले ही दिन श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। शाम को कथावाचिका सुश्री सौम्या भारती, जो संस्थान की वरिष्ठ साध्वी हैं, ने अपने ओजस्वी वक्तव्यों से श्रीराम जन्म और बाललीलाओं की भावविभोर कर देने वाली प्रस्तुति दी। उन्होंने कहा कि रामकथा केवल कथा नहीं, हमारी संस्कृति का जीवंत प्रवाह है, जो समाज को जोड़ती है और नई पीढ़ी को दिशा देती है। कथा प्रतिदिन शाम 5 से रात 8ः30
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| राम कथा सुनाते कथा वाचक |
बजे तक होगी। आयोजन स्थल को आकर्षक झांकियों, रंगोली, दीपों एवं राम दरबार की भव्य सजावट से सुसज्जित किया गया है। तुलसीदास सोसाइटी के स्वयंसेवक व्यवस्था और स्वच्छता में सहयोग कर रहे हैं। विशेष बात यह है कि कथा का प्रसारण डिजिटल प्लेटफार्मों जैसे यूटयूब व फेसबुक लाइव पर भी किया जा रहा है, जिससे देश.विदेश के श्रद्धालु भी रामकथा से जुड़ रहे हैं। एक्स के सोशल मीडिया हैंडल्स पर आयोजन की नियमित जानकारी साझा की जा रही है। कथा स्थल पर पोस्टर, सेल्फी प्वाइंट और स्वच्छता संदेश यह संकेत दे रहे हैं कि धर्म और जन.जागरूकता का समन्वय संभव है। स्थानीय विद्यालयों के छात्रों द्वारा प्रस्तुत सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने कथा को और जीवंत कर दिया। संस्थान के स्वामी जी ने बताया कि 30 जून को कथा समापन अवसर पर विशाल भंडारे और हवन.यज्ञ का आयोजन होगा, जिसमें जिले भर के संतए समाजसेवी और श्रद्धालु सम्मिलित होंगे। उन्होंने सभी से समय पर पहुँचने और आयोजन को सफल बनाने का आह्वान किया।

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