कृष्ण अवतार व गोवर्धन पूजा अलौकिक वर्णन
चित्रकूट, सुखेन्द्र अग्रहरि । पुरानी बाजार स्थित स्वर्गीय राजेंद्र पांडेय के निवास में चल रही श्रीमद्भागवत कथा महापुराण का बुधवार को पांचवां दिन उत्साह और भक्ति के रंगों में डूबा रहा। नयागांव से पधारे आचार्य रवि शास्त्री जी ने भगवान श्रीराम के अवतार प्रसंग के बाद श्रीकृष्ण जन्मोत्सव का ऐसा दिव्य चित्र खींचा कि पूरा पंडाल भावमय हो उठा। आचार्य जी ने बड़े ही रोचक और प्रभावी ढंग से श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं का वर्णन किया कि कैसे बाल सुलभ चंचलता में वे पूरे गोवर्धन नगर को आनंद से भर देते थे और ब्रज की गोपियां उनकी मोहक लीलाओं पर दीवानी हो जाया करती थीं। कथा के दौरान आचार्य रवि शास्त्री ने पूतना वध के पावन प्रसंग को भी विस्तार से समझाया और बताया कि श्रीकृष्ण की बाल लीलाएं केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि धर्म की विजय और संरक्षण का प्रतीक हैं। आगे
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| भागवत कथा में श्री कृष्ण की बाल लीलाओं का वर्णन करते आचार्य रवि शास्त्री |
उन्होंने गोवर्धन पूजा के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह पर्व केवल धार्मिक अनुष्ठान ही नहीं, बल्कि प्रकृति, पर्वत और पर्यावरण के प्रति आभार का संदेश भी देता है। आज की कथा में श्रोताओं ने श्रीकृष्ण के बाल्यकाल की मधुर लीलाएं, जन्मोत्सव का उल्लास और गोवर्धन पूजा की परंपराकृतीनों का अनूठा संगम अनुभव किया। माहौल भक्तिरस से सराबोर रहा और श्रद्धालुओं ने अगले दिन की कथा के लिए उत्सुकता जताई। इस मौके पर कथा सुनने के लिए पूरे शहर से भारी जनमानस मौजूद था।
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