मोदय विश्वविद्यालय में व्याख्यान और परिचर्चा संपन्न
चित्रकूट, सुखेन्द्र अग्रहरि : महात्मा गांधी चित्रकूट ग्रामोदय विश्वविद्यालय में भारतीय भाषा समिति भारत सरकार द्वारा मंगलवार को एक दिवसीय भारतीय भाषा परिवार व्याख्यान एवं परिचर्चा कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में ग्रामोदय विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो आलोक चौबे ने कहा कि भारतीय भाषाएं आम आदमी की समझ विकसित करती है, प्रेम बढ़ाती है, आपस में जोड़ने का काम करती है। विद्यार्थियों को अपनी मातृ भाषा के साथ साथ एक भारतीय भाषा का भी अध्ययन करना चाहिए। कहा कि भाषा के नाम पर हुई गलती को लेकर हमें आत्म चिंतन कर सुधार करना चाहिए। भाषा विद्यार्थियों की प्रगति में सकारात्मक योगदान दे, इस गौरवशाली उद्देश्य को आत्मसात कर शैक्षणिक गतिविधियों को संचालित करना चाहिए। मातृभाषा में ही बच्चों की फर्स्ट हैंड अंडरस्टैंडिंग होती है। हिंदी एवं भारतीय भाषाओं के महत्व को साझा करते हुए उन्होंने जोधपुर आईआई टी में हुए प्रयोग का उदाहरण दिया और बताया कि वहां इंजीनियरिंग पाठ्यक्रम के द्वितीय वर्ष में ब्रांच चयन में हिंदी भाषा को लेकर एक प्रयोग किया गया, जिसके फलस्वरूप हिंदी माध्यम से परीक्षा देने वाले विद्यार्थियों ने अंग्रेजी माध्यम से परीक्षा देने वाले विद्यार्थियों से अधिक अंक अर्जित किए।
इलाहाबाद विश्वविद्यालय के हिंदी एवं भारतीय भाषा विभाग के प्रो योगेंद्र प्रताप सिंह ने कहा कि भारतीय भाषा परिवार एकता का परिवार है। संस्कृत शुद्ध वैज्ञानिक भाषा है, इसमें कोई अपवाद नहीं है और भारतीय भाषाओं की जननी के रूप में सर्वमान्य है। आदि गुरु शंकराचार्य द्वारा स्थापित चारों धाम की व्याख्या करते हुए कहा कि अपने देश के प्रत्येक कोने में जाए और वहां की संस्कृति और भाषा का अनुसरण करें, जो भाषाएं दूसरों का सम्मान नहीं करती, वह सिकुड़ रही है। भाषाएं आपस में बात करती हैं, जिससे आपस में मेल जोल बढ़ता है। कला संकाय के अधिष्ठाता प्रो. नंदलाल मिश्रा ने कहा कि भाषा विचार विनिमय का माध्यम है। उन्होंने मनोवैज्ञानिक ढंग से भाषा को परिभाषित किया। इस दौरान भारतीय भाषा परिवार को एक करने की दृष्टि से प्रकाशित दो पुस्तकों का विमोचन किया गया। कार्यक्रम संयोजक और हिंदी विभागाध्यक्ष प्रो. ललित कुमार सिंह ने कार्यक्रम की पृष्ठभूमि औचित्य एवं उद्देश्य पर प्रकाश डालते हुए कहा कि भारतीय भाषा परिवार भारत की बहुरंगी संस्कृति का जीवंत प्रमाण है। भाषा केवल संप्रेषण का साधन ही नहीं बल्कि हमारी पहचान, इतिहास एवं सांस्कृतिक चेतना का संवाहक भी है। इस मौके पर राजनीति विज्ञान की विभागाध्यक्ष प्रो नीलम चौरे, प्रो कपिल देव मिश्रा, प्रो प्रज्ञा मिश्रा, प्रो नीलम चौरे, प्रो अजय आर चौरे, प्रो सुनीता सिंह, प्रो कमलेश कुमार थापक, प्रो घनश्याम गुप्ता, प्रो वाई के सिंह, प्रो त्रिभुवन सिंह, डॉ जयप्रकाश तिवारी आदि मौजूद रहे।
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