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Sunday, January 11, 2026

त्रिलोकासन से मजबूत बनते है जंघा, पिंडली व घुटनें- योगाचार्य

चित्रकूट, सुखेन्द्र अग्रहरि  : जिला मुख्यालय के कुबेर गंज कर्वी निवासी योगाचार्य रमेश सिंह राजपूत ने योग कराते हुए बताया कि त्रिलोकासन संपूर्ण शरीर में अद्भुत शक्ति और ऊर्जा का संचार करता है। त्रिलोक का अर्थ है धरती, आकाश (ब्रह्म लोक) और धरती के नीचे पाताल इन तीनों लोकों का समन्विक लाभ त्रिलोकासन को करने से प्राप्त होता है। योगाचार्य ने बताया कि संपूर्ण शरीर में 10 प्रकार के प्राण कार्य करते हैं, जिसके कारण हमारा शरीर काम कर पाता है। कमर से नीचे अपान वायु काम करती है जिससे जंघा, पिंडली, घुटने टखने सुंदर, सुडौल और मजबूत रहते हैं, इस प्राण वायु के कारण हमारा शरीर का उठना, बैठना, चलना, दौड़ना, संतुलन आदि संभव है, प्रजनन तंत्र की कार्य प्रणाली अपान वायु के मजबूत होने पर सुचारु रूप से चलती है। उदर क्षेत्र में समान वायु कार्य करती है जिससे पेट संबंधित स्वास्थ्य बेहतर रहता है। वक्षीय क्षेत्र में प्राण वायु, कंठ से ऊपर उदान वायु तथा संपूर्ण शरीर में व्यान प्राण कार्य करते हैं, इन प्राणों के सबल होने पर ही कमर से नीचे, शरीर का मध्य भाग और कंठ से ऊपर का भाग तालमेल के साथ कार्य करके जीवन को सुखमय बनाते हैं। इन प्राणों की रुग्णता के कारण हम नाना


प्रकार की बीमारियों से व्यथित होते रहते हैं। योगाचार्य ने बताया कि त्रिलोक आसन से पैरों का कंपवात ठीक होता है तथा जंघाओं की अतिरिक्त चर्बी कम होती है, जिससे वे सुडौल, सुंदर, शक्तिशाली बनती है, कमर पतली हो जाती है, कमर जंघा घुटनों पिंडली टखनों पंजों के दर्द मिटते हैं और थकान में राहत मिलती है। बताया इसे करने के लिए दोनों पैरों के बीच लगभग 90 सेंटीमीटर की दूरी रखते हैं, पैर के पंजों की दिशा बाहर की ओर, दोनों हाथ कमर पर इस प्रकार रखते हैं कि अंगूठे पीठ की तरफ और उंगलियां सामने की ओर रहें। श्वास लेकर छोड़ते हुए घुटनों को मोड़ते हुए नीचे की ओर दबाते हैं, जिससे जंघा धरती के समांतर और धड़ तथा सिर सीधा रखते हैं। इस स्थिति में 10 सेकंड ठहरने के बाद सांस भरते हुए धीरे-धीरे घुटनों से सीधे होते हैं ऐसा पांच बार दोहराते हैं। शिथिल ताड़ासन में आकर शरीर में हुए सकारात्मक परिवर्तनों का अनुभव करते हैं। सावधानी के तौर पर घुटनों में दर्द की दशा में इसे धीरे-धीरे करते हैं।


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