शिकायतों में सुस्ती पर प्रशासन नाराज
तीन विभागों को चेतावनी
चित्रकूट, सुखेन्द्र अग्रहरि । जिले की प्रशासनिक गलियों में आज दो बड़े एजेंडे एक साथ गूंजे- एक तरफ डिजिटल भारत के सपने को पंख देने वाली जनगणना 2027 की स्वगणना व्यवस्था, तो दूसरी ओर जनता की शिकायतों पर सुस्त पड़े सिस्टम की सख्त खबर। जिलाधिकारी के निर्देशों के क्रम में मुख्य विकास अधिकारी डीपी पाल की अध्यक्षता में हुई समीक्षा बैठक में साफ संकेत दिया गया कि अब आंकड़ों का खेल नहीं, बल्कि जवाबदेही का दौर चलेगा। अपर जिलाधिकारी (वि/रा) एवं जिला जनगणना अधिकारी ने बताया कि 7 मई से 21 मई तक खुलने वाला स्वगणना पोर्टल आमजन और कर्मचारियों को खुद अपनी जानकारी दर्ज करने का मौका देगा- एक ऐसा कदम जो साइबर फ्रॉड पर लगाम कसने के साथ-साथ डेटा संग्रह को रफ्तार देगा। पंचायतों से लेकर स्कूलों, आंगनवाड़ियों और बैंकों तक, हर स्तर पर खुद की गिनती, खुद की जिम्मेदारी का मंत्र दिया गया। लेकिन बैठक का
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| बैठक में मौजूद अधिकारीगण |
दूसरा चेहरा कहीं ज्यादा सख्त था। आईजीआरएस समीक्षा में जिले की गिरती रैंकिंग पर मुख्य विकास अधिकारी का गुस्सा साफ झलका। जल निगम, समाज कल्याण और कृषि विभाग की लापरवाही पर उन्होंने दो टूक कहा- अब कागजी निस्तारण नहीं चलेगा। अधिकारियों को मौके पर जाकर शिकायतों का समाधान करने, फोटो साक्ष्य देने और पीड़ित से संतुष्टि सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। चेताया कि मुख्यमंत्री की प्राथमिकता वाले इस पोर्टल पर लापरवाही अब सीधे कार्रवाई को न्योता देगी। स्पष्ट है, जिला प्रशासन अब दो मोर्चों पर खड़ा है- एक तरफ डिजिटल पारदर्शिता की नई इबारत, दूसरी ओर जवाबदेही की सख्त तलवार। अब देखना है कि सिस्टम सुधरता है या फिर चेतावनियां ही खबर बनती रहती हैं।
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