सुहास एलवाई व अजीत कुमार को मानद उपाधि
गौरव और संस्कारों का विराट महाकुंभ
चित्रकूट, सुखेन्द्र अग्रहरि । जिले स्थित जगदगुरु रामभद्राचार्य दिव्यांग राज्य विश्वविद्यालय का नवम दीक्षांत समारोह सोमवार को भव्यता, गरिमा और भारतीय संस्कृति की अनुपम छटा के बीच संपन्न हुआ। बैंड की मधुर धुनों के साथ निकली शोभायात्रा ने पूरे विश्वविद्यालय परिसर को उत्सवमय बना दिया। अतिथियों, कुलाधिपति और विश्वविद्यालय परिवार का गरिमामय प्रवेश देखते ही बन रहा था। मां सरस्वती की वंदना और दीप प्रज्ज्वलन के साथ शुरू हुए समारोह में कुलपति प्रोफेसर शिशिर कुमार पांडेय ने विश्वविद्यालय की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए कहा कि यह संस्थान अब केवल बुंदेलखंड ही नहीं, बल्कि पूरे देश के दिव्यांगजनों के लिए आशा, आत्मविश्वास और उच्च शिक्षा का केंद्र बन चुका है। उन्होंने नए पाठ्यक्रमों, विद्यार्थियों की बढ़ती संख्या और विश्वविद्यालय की लगातार
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| दिव्यांग विश्वविद्यालय का नवम दीक्षांत समारोह में मौजूद अतिथिगण |
प्रगति को ऐतिहासिक बताया। समारोह में पैरालंपिक रजत पदक विजेता आईएएस अधिकारी सुहास एलवाई तथा चित्रकूट धाम मंडल के मंडलायुक्त अजीत कुमार को दिव्यांग सशक्तिकरण, खेल और लोक प्रशासन में उत्कृष्ट योगदान के लिए मानद उपाधियों से सम्मानित किया गया। इस दौरान विश्वविद्यालय की शोध पत्रिका समानुभूति सहित कई महत्वपूर्ण पुस्तकों का विमोचन भी हुआ। समारोह में 2417 उपाधियां, 141 स्वर्ण पदक, 6 कुलाधिपति पदक और 39 शोध उपाधियां प्रदान कर प्रतिभाओं का सम्मान किया गया। मुख्य अतिथि राज्य मंत्री नरेंद्र कश्यप ने विश्वविद्यालय को वैश्विक पहचान दिलाने के लिए हरसंभव सरकारी सहायता देने का भरोसा दिलाया। वहीं रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने डिजिटल माध्यम से संबोधित करते हुए विश्वविद्यालय के विकास में निरंतर सहयोग का आश्वासन दिया। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए जगदगुरु स्वामी रामभद्राचार्य ने शिक्षा को राष्ट्र सेवा का सबसे बड़ा माध्यम बताते हुए विद्यार्थियों से समाज और देश के लिए समर्पित भाव से कार्य करने का आह्वान किया।
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| उपाधि प्राप्त करते आयुक्त अजीत कुमार |
आयुक्त अजीत कुमार को मिली डीलिट की मानद उपाधि चित्रकूटधाम मंडल के लिए उस समय गौरव का क्षण बन गया, जब जगद्गुरु रामभद्राचार्य दिव्यांग राज्य विश्वविद्यालय ने आयुक्त अजीत कुमार को डी.लिट. (मानद) उपाधि से सम्मानित किया। यह सम्मान केवल एक प्रशासनिक अधिकारी का अभिनंदन नहीं, बल्कि जनसेवा, संवेदनशील शासन और पारदर्शी प्रशासन की उस कार्यशैली की स्वीकृति माना जा रहा है, जिसने गरीब, दिव्यांग, वृद्ध और वंचित वर्गों तक योजनाओं का लाभ पहुँचाने में नई पहचान बनाई। आयुक्त अजीत कुमार के नेतृत्व में शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, पेयजल और जनसुनवाई व्यवस्था में सुधारात्मक कदमों ने प्रशासनिक कार्यप्रणाली को नई दिशा दी। नियमित निरीक्षण, प्रभावी मॉनिटरिंग और त्वरित समस्या निस्तारण से आमजन का भरोसा मजबूत हुआ। युवाओं को स्वरोजगार के लिए प्रेरित करने से लेकर दिव्यांगजनों एवं महिलाओं के कल्याण तक, उनकी कार्यशैली को जनोन्मुख प्रशासन की मिसाल माना जा रहा है। सम्मान की घोषणा के बाद मंडलभर में खुशी की लहर दौड़ गई और अधिकारियों, जनप्रतिनिधियों तथा सामाजिक संगठनों ने उन्हें शुभकामनाएँ दीं।
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