चित्रकूट मंडल के इकलौते 'हैट्रिक' राष्ट्रीय सचिव अजय चौहान की दावेदारी से तिंदवारी में बढ़ी सियासी हलचल
बांदा, के एस दुबे । आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर समाजवादी पार्टी के भीतर टिकट की रस्साकशी तेज हो गई है। तिंदवारी विधानसभा क्षेत्र से पार्टी के वरिष्ठ युवा नेता अजय चौहान ‘दादा’ ने मंगलवार को आधिकारिक तौर पर अपनी दावेदारी पेश कर दी। ग्राम सिंधनकलां निवासी अजय चौहान ने अपने पिता की जनसेवा की विरासत और पिछले 15 वर्षों के कड़े राजनीतिक संघर्ष को आधार बनाकर नेतृत्व से अवसर मांगा है।
2011 से निष्ठा: विपक्ष की राजनीति में झेले जेल और मुकदमे
अजय चौहान 'दादा' की पहचान सपा के एक ऐसे समर्पित सिपाही की है जो वर्ष 2011 से लगातार सक्रिय हैं। 2012 के चुनाव में सरकार बनाने के लिए जमीन तैयार करने से लेकर 2017 के बाद विपक्ष में रहकर संघर्ष करने तक, दादा ने हर मोर्चे पर पार्टी का झंडा बुलंद रखा। इस दौरान उन्होंने न केवल मुकदमे झेले, बल्कि कई बार जेल की सलाखों के पीछे भी रहे। उनकी यही अटूट निष्ठा उन्हें कार्यकर्ताओं के बीच बेहद लोकप्रिय बनाती है।
मंडल के इकलौते नेता, जिन्होंने लगाई राष्ट्रीय सचिव की ‘हैट्रिक’
अजय चौहान के पक्ष में सबसे मजबूत कड़ी उनकी संगठनात्मक पकड़ है। वे समूचे चित्रकूट मंडल के इकलौते ऐसे नेता हैं जिन्हें 2019 से अब तक लगातार तीन बार पार्टी के युथ ब्रिगेड में राष्ट्रीय कार्यकारिणी में जगह पाने में कामयाब रहे है। वर्तमान में वे समाजवादी यूथ ब्रिगेड के राष्ट्रीय सचिव हैं। पार्टी आलाकमान का उन पर यह अटूट भरोसा उनकी राजनीतिक उपयोगिता को साबित करता है।
जब कोतवाल की जीप के आगे लेट गए थे ‘दादा’
कार्यकर्ताओं के बीच दादा अपनी जुझारू छवि के लिए जाने जाते हैं। 2022 चुनाव से पूर्व किसान आंदोलन के दौरान जब पुलिस ने जेएमके मैरिज हॉल के बाहर घेराबंदी कर ट्रैक्टर रैली को रोकना चाहा, तब अजय चौहान अपनी जान की परवाह किए बिना तत्कालीन शहर कोतवाल की जीप के आगे लेट गए थे। उनके इस अदम्य साहस के कारण पुलिस उलझी रही और पार्टी के अन्य नेता ट्रैक्टर रैली निकालने में सफल रहे। इस घटना ने उन्हें सपा के ‘संकटमोचक’ के रूप में पहचान दिलाई।
ठाकुर समीकरणों के बीच युवा कार्ड की चर्चा
तिंदवारी में ठाकुर मतदाताओं की निर्णायक भूमिका है। अजय चौहान एक निष्ठावान और निर्विवाद युवा चेहरे के रूप में उभर रहे हैं। अब देखना दिलचस्प होगा कि सपा मुखिया अखिलेश यादव अनुभव को तरजीह देते हैं या फिर 2011 से लगातार लाठियां खाकर संघर्षों से तपे इस युवा चेहरे पर दांव लगाते हैं।


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