सोहन हलुआ के साथ बालूसाही को भी बांदा के ओडीओसी में किया गया है शामिल
ओडीओसी उद्यमियों को प्रोत्साहित करने के लिए आर्थिक मदद देगी सरकार
बांदा, के एस दुबे । बुंदेलखंड की ऐतिहासिक धरती बांदा अब सिर्फ अपने किलों और पत्थरों के लिए ही नहीं बल्कि अपने जायके के लिए भी वैश्विक पटल पर चमकेगी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की दूरदर्शी एक जिला एक व्यंजन (ODOC) योजना के तहत बांदा के सुप्रसिद्ध सोहन हलुआ और बालूशाही को शामिल कर सरकार ने स्थानीय कारीगरों के लिए सुनहरे भविष्य के द्वार खोल दिए हैं। योगी सरकार ने इस मुहिम को गति देने के लिए एक विशेष सेल बनाने का निर्णय लिया है। यह सेल न केवल सोहन हलुआ और बालूशाही से जुड़े उद्यमियों की समस्याओं का समाधान करेगी। बल्कि उन्हें व्यापार बढ़ाने के लिए जरूरी आर्थिक सहायता और बैंक लोन की सुविधाएं भी सुनिश्चित कराएगी। सरकार का लक्ष्य है कि छोटे स्तर पर काम कर रहे कारीगरों को उद्यमी के रूप में विकसित किया जाए।
अच्छे प्रशिक्षण से निखरेगा स्वाद और हुनर
बांदा के पारंपरिक हलवाइयों और कारीगरों के पारंपरिक हुनर को आधुनिक तकनीक से जोड़ने के लिए सरकार विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाएगी। इसमें व्यंजनों की पैकेजिंग, गुणवत्ता, स्वच्छता के मानक और लंबी शेल्फ-लाइफ सुनिश्चित करने के गुर सिखाए जाएंगे। जिससे बांदा की ये मिठाईयां बिना खराब हुए देश-विदेश के बाजारों तक पहुंच सके। कहा जाए तो यह योजना प्रदेश की सांस्कृतिक और जायके वाली विरासत को सहेजने का एक बेहतरीन प्रयास है। यह पहल न केवल स्थानीय व्यंजनों को वैश्विक मंच देगी बल्कि उत्तर प्रदेश के पर्यटन और यहां की अर्थव्यवस्था को भी नई ऊंचाइयों पर ले जाएगी।
स्वाद यूपी का' अभियान में दिखेगा बांदा का रंग
प्रदेश सरकार के 'स्वाद यूपी का' अभियान के अंतर्गत बांदा के सोहन हलुआ को एक प्रमुख ब्रांड के तौर पर पेश किया जा रहा है। बालूशाही के साथ-साथ सोहन हलुआ को ओडीओसी की सूची में जगह मिलने से स्थानीय स्तर पर रोजगार के हजारों नए अवसर सृजित होंगे। कहा जाए तो निश्चित ही सरकार के इस प्रोत्साहन से बांदा के व्यंजनों की खुशबू अब सात समंदर पार तक जाएगी।


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