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Tuesday, July 7, 2026

22 दिनों से धरने पर बैठे किसानों को मंडलायुक्त का आश्वासन मुख्यमंत्री से कराई जाएगी मुलाकात

बांदा, के एस दुबे । जनपद के ग्राम अमलीकौर और लोहरा में चकबंदी प्रक्रिया में कथित बड़े घोटाले और गंभीर अनियमितताओं के खिलाफ किसानों का गुस्सा अब चरम पर पहुंच गया है। पिछले 22 दिनों से क्रमिक अनशन और बीते 6 दिनों से अन्न-जल त्यागकर आमरण अनशन पर बैठे किसानों के समर्थन में अब सियासी दल भी उतर आए हैं। सोमवार को जनता दल यूनाइटेड की प्रदेश उपाध्यक्ष एवं बुंदेलखंड प्रभारी शालिनी सिंह पटेल के नेतृत्व में सैकड़ों प्रभावित किसानों ने चित्रकूट धाम मंडल के मंडलायुक्त (कमिश्नर) कार्यालय का घेराव किया और कमिश्नर को ज्ञापन सौंपकर निष्पक्ष जांच और त्वरित न्याय की गुहार लगाई।


किसानों की गंभीर पीड़ा और आक्रोश को देखते हुए मंडलायुक्त ने संवेदनशीलता दिखाई। उन्होंने किसानों को आश्वस्त किया कि पूरे मामले की तह तक जाने के लिए एक विशेष संयुक्त जांच समिति गठित की जा रही है। इस समिति में चित्रकूट और हमीरपुर जनपद के चकबंदी विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ-साथ मंडल प्रशासन की ओर से संतोष कुमार राय को शामिल किया गया है। कमिश्नर ने कहा कि उनके अधिकार क्षेत्र में आने वाले सभी बिंदुओं पर पूरी निष्पक्षता और गंभीरता से जांच कराई जाएगी और इसका आधिकारिक आदेश तुरंत जारी कर दिया जाएगा।

चूंकि आगामी 9 जुलाई को उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का बांदा दौरा प्रस्तावित है, इसे देखते हुए मंडलायुक्त ने अनशनकारी किसानों को एक बड़ा आश्वासन दिया। उन्होंने कहा कि वह शासन स्तर पर पूरी कोशिश करेंगे कि पीड़ित किसानों के एक प्रतिनिधिमंडल की मुलाकात सीधे मुख्यमंत्री जी से कराई जाए, ताकि किसान अपनी समस्याओं और चकबंदी विभाग की मनमानी को सीधे उनके सामने रख सकें। किसानों के हक में आवाज बुलंद करते हुए जेडीयू की प्रदेश उपाध्यक्ष शालिनी सिंह पटेल ने स्थानीय प्रशासन को आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा कि किसानों का यह आंदोलन पूरी तरह शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक है, लेकिन बेहद शर्मनाक है कि इतने दिनों से अन्नदाता भूखा-प्यासा बैठा है और उनकी जायज मांगों की अनदेखी की जा रही है।

किसानों के साथ हो रहा यह अन्याय अब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। जेडीयू हर कदम पर किसानों के साथ मजबूती से खड़ी है। यदि प्रशासन ने इस विवाद का शीघ्र समाधान नहीं निकाला या 9 जुलाई को किसानों के प्रतिनिधिमंडल को मुख्यमंत्री जी से मिलने से रोका, तो हम किसानों के साथ बांदा से लखनऊ तक पैदल कूच करेंगे। न्याय मिलने तक हमारा यह संघर्ष जारी रहेगा। अनशन पर बैठे किसानों का आरोप है कि अमलीकौर और लोहरा गांवों में चक आवंटन, पैमाइश (नाप-जोख) और भूमि के मूल्यांकन (मालियत निर्धारण) में चकबंदी विभाग के अधिकारियों और लेखपालों ने बड़े पैमाने पर हेराफेरी और भ्रष्टाचार किया है। किसानों की उपजाऊ और कीमती जमीनें छीनकर रसूखदारों को दे दी गईं और विरोध करने पर फाइलों को ही गायब कर दिया गया। इसी धांधली के विरोध में किसान दिल्ली बॉर्डर की तर्ज पर बांदा के अशोक लाट पर डटे हुए हैं।



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