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Monday, July 13, 2026

शिक्षकों के अधिकारों की बुलंद हुई आवाज, सांसद को सौंपा ज्ञापन

एनसीटीई की न्यूनतम अर्हता को शिक्षा अधिकार अधिनियम में शामिल करने की मांग

25 लाख शिक्षकों के हितों का बताया मामला

फतेहपुर, मो शमशाद । शिक्षकों के अधिकारों और भविष्य से जुड़े एक महत्वपूर्ण मुद्दे को लेकर टीचर्स फेडरेशन ऑफ इंडिया ने सोमवार को सांसद के माध्यम से केंद्र सरकार को ज्ञापन भेजकर राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (एनसीटीई) द्वारा निर्धारित 23 अगस्त 2010 की  न्यूनतम शैक्षणिक अर्हता को शिक्षा का अधिकार अधिनियम (आरटीई)-2009 का अभिन्न हिस्सा बनाने की मांग की। संगठन का कहना है कि इस विषय पर शीघ्र निर्णय न होने से देशभर के लाखों शिक्षकों में असमंजस की स्थिति बनी हुई है। फेडरेशन के अध्यक्ष राजेन्द्र सिंह व महामंत्री विजय कुमार त्रिपाठी की अगुवई में एक प्रतिनिधिमंडल सोमवार को लोक निर्माण विभाग के डाक बंगले पहुंचा। जहां जिले के सांसद नरेश उत्तम पटेल को एक ज्ञापन सौंपकर कहा कि शिक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने और

सांसद को ज्ञापन सौंपता फेडरेशन का प्रतिनिधिमंडल।

शिक्षकों के हितों की रक्षा के लिए आवश्यक है कि एनसीटीई द्वारा निर्धारित न्यूनतम अर्हताओं को संसद से विधिवत पारित कर आरटीई अधिनियम में शामिल किया जाए। इससे भविष्य में शिक्षक भर्ती, सेवा सुरक्षा और शैक्षणिक योग्यता से जुड़े विवादों का स्थायी समाधान संभव हो सकेगा। ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया कि वर्तमान में देशभर के लगभग 25 लाख शिक्षक एवं उनके परिवार इस मुद्दे से प्रत्यक्ष रूप से प्रभावित हैं। यदि केंद्र सरकार इस मांग को स्वीकार करती है तो लाखों शिक्षकों को कानूनी सुरक्षा मिलने के साथ शिक्षा व्यवस्था में भी स्थिरता आएगी। संगठन ने सांसद से इस विषय को संसद में गंभीरता से उठाने और केंद्र सरकार से शीघ्र आवश्यक कार्रवाई कराने का आग्रह किया। टीचर्स फेडरेशन ऑफ इंडिया के पदाधिकारियों ने कहा कि शिक्षकों के हितों की अनदेखी किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं होगी। संगठन लंबे समय से इस मुद्दे को विभिन्न स्तरों पर उठा रहा है और अब जनप्रतिनिधियों के माध्यम से सरकार तक अपनी बात पहुंचा रहा है। उन्होंने उम्मीद जताई कि सरकार शिक्षकों की भावनाओं का सम्मान करते हुए सकारात्मक निर्णय लेगी। ज्ञापन की प्रतिलिपि प्रधानमंत्री व केंद्रीय शिक्षा मंत्री को भी भेजी गई है, ताकि इस विषय पर शीघ्र विचार कर आवश्यक विधायी प्रक्रिया शुरू की जा सके। 


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