समाज कल्याण विभाग पर लापरवाही के आरोप
विकास भवन में आए दिन लगा रहे चक्कर,
हर बार बताई जाती है नई कमी; अधिकारी बोले—मुख्यालय स्तर से आती हैं आपत्तियां
बांदा, के एस दुबे । वृद्धावस्था पेंशन का लाभ पाने के लिए जिले के कई बुजुर्ग पिछले करीब तीन वर्षों से समाज कल्याण विभाग के चक्कर लगाने को मजबूर हैं। पेंशन न मिलने से परेशान वृद्धों ने विभागीय कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि हर बार कोई न कोई नई कमी बताकर उन्हें वापस कर दिया जाता है। बुधवार को विकास भवन स्थित समाज कल्याण अधिकारी कार्यालय पहुंचे कई बुजुर्गों ने बताया कि वे वर्षों से पेंशन स्वीकृत कराने के लिए लगातार कार्यालय के चक्कर लगा रहे हैं। कभी बैंक खाते में कमी, कभी केवाईसी, कभी आधार
सत्यापन, तो कभी अन्य दस्तावेजों की कमी बताकर आवेदन लंबित कर दिया जाता है। उनका कहना है कि एक कमी पूरी करने के बाद अगली बार कोई दूसरी आपत्ति बता दी जाती है, जिससे उन्हें बार-बार कार्यालय आना पड़ता है। जसपुरा और कमासिन ब्लाक की दूरी लगभग 50 किलोमीटर से ऊपर है बार-बार उन्हें परेशान किया जाता है। पीड़ित बुजुर्गों का कहना है कि उनकी उम्र अधिक होने के कारण बार-बार विकास भवन तक आना-जाना बेहद कठिन है, लेकिन इसके बावजूद उन्हें संतोषजनक जवाब या स्पष्ट समाधान नहीं मिल रहा है। उन्होंने विभाग से लंबित प्रकरणों का शीघ्र निस्तारण कर पात्र लाभार्थियों को पेंशन का लाभ दिलाने की मांग की है।
समाज कल्याण अधिकारी का पक्ष
जब इस संबंध में समाज कल्याण अधिकारी से संपर्क किए जाने पर उन्होंने बताया कि आवेदन और अभिलेख मुख्यालय को भेजे जाते हैं। कई मामलों में मुख्यालय स्तर से आपत्तियां या कमियां बताई जाती हैं, जिनके आधार पर आवेदकों से आवश्यक दस्तावेज पूरे कराए जाते हैं। उन्होंने कहा कि कार्यालय से अभिलेख पूर्ण कर भेजे जाते हैं तथा पेंशन स्वीकृति की प्रक्रिया उच्च स्तर से संचालित होती है।


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