युवा कृषि स्नातक बनें किसानों और आधुनिक तकनीक के बीच ज्ञान सेतु
बांदा, के एस दुबे । कृषि उन्नति में युवा कृषि स्नातकों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। युवा अपने ज्ञान, कौशल एवं तकनीकी दक्षता का उपयोग देश की कृषि और किसानों की प्रगति के लिए करें। छोटे एवं सीमांत किसानों तक आधुनिक कृषि तकनीकों को प्रभावी ढंग से पहुंचाने में कृषि स्नातक महत्वपूर्ण ज्ञान सेतु की भूमिका निभा सकते हैं। यह बात दीक्षांत समारोह की अध्यक्षता कर रहे विशेष कार्याधिकारी श्री सुधीर एम. बोबड़े ने अपने संबोधन में कही।
उन्होंने कहा कि कृषि के विभिन्न क्षेत्रों में भारत ने उल्लेखनीय प्रगति की है। इस उपलब्धि के पीछे देश के करोड़ों किसानों और वैज्ञानिकों की प्रतिबद्धता एवं परिश्रम महत्वपूर्ण रहा है। उन्होंने कहा कि बदलते कृषि परिदृश्य में युवाओं को नई तकनीकों, अनुसंधान और नवाचार के माध्यम से कृषि को और अधिक समृद्ध बनाने की दिशा में कार्य करना चाहिए।
बुंदेलखण्ड की चुनौतियों को अवसर के रूप में देखें
श्री बोबड़े ने बुंदेलखण्ड की कृषि संबंधी चुनौतियों का उल्लेख करते हुए युवा शोधार्थियों से इन समस्याओं को केवल कठिनाई के रूप में न देखते हुए नवाचार और अनुसंधान के व्यापक अवसर के रूप में लेने का आह्वान किया। उन्होंने विशेष रूप से ऐसी फसल किस्मों के विकास पर जोर दिया, जो कम पानी में अधिक उत्पादन देने में सक्षम हों। उन्होंने कहा कि जल संकट और बदलती जलवायु को देखते हुए कृषि अनुसंधान का फोकस संसाधनों के बेहतर उपयोग और किसानों की आय बढ़ाने वाली तकनीकों पर होना चाहिए। उन्होंने उपाधि प्राप्त विद्यार्थियों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि देश के भविष्य को गढ़ने की क्षमता युवाओं में है। विद्यार्थी अपने ज्ञान का उपयोग समाज और राष्ट्रहित में करें तथा संस्थान की गरिमा एवं राष्ट्र के प्रति अपने दायित्व को सदैव सर्वोपरि रखें।
विश्वविद्यालय की सुविधाओं के सुदृढ़ीकरण पर जोर
इससे पूर्व माननीय कुलाधिपति महोदया के निर्देश पर गठित समिति ने विश्वविद्यालय का भ्रमण कर यहां उपलब्ध सुविधाओं, व्यवस्थाओं एवं विभिन्न समस्याओं का निरीक्षण किया था। अपने संबोधन में श्री सुधीर एम. बोबड़े ने विश्वविद्यालय के भवनों एवं परिसर की सराहना करते हुए कहा कि इनकी सुंदरता, उपयोगिता और गुणवत्ता को बनाए रखने के लिए समय-समय पर समुचित रखरखाव आवश्यक है। उन्होंने विशेष रूप से महिला छात्रावासों में वाई-फाई एवं वॉशिंग मशीन जैसी आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने पर बल दिया। साथ ही छात्रावासों में भोजन की गुणवत्ता, स्वच्छता और समग्र रखरखाव को और बेहतर किए जाने की आवश्यकता बताई। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को बेहतर, सुरक्षित और सुविधाजनक शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध कराना विश्वविद्यालय की प्राथमिकताओं में शामिल होना चाहिए। उन्होंने कहा कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के साथ बेहतर आधारभूत सुविधाएं विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। ऐसे में विश्वविद्यालय की मौजूदा व्यवस्थाओं को मजबूत करने के साथ-साथ विद्यार्थियों की आवश्यकताओं के अनुरूप सुविधाओं का निरंतर विस्तार किया जाना आवश्यक है।


No comments:
Post a Comment