कार्रवाई से बचने के लिए कथित डॉक्टरों ने सड़क पर किया प्रदर्शन
बांदा, के एस दुबे । जनपद में अवैध रूप से संचालित हो रहे क्लीनिकों और कथित झोलाछाप डॉक्टरों के खिलाफ स्वास्थ्य विभाग द्वारा उच्चस्तरीय जांच बैठाए जाने के बाद मामला तूल पकड़ता जा रहा है। कार्रवाई की सुगबुगाहट से बौखलाए कथित संचालकों ने गुरुवार को कलेक्ट्रेट पहुंचकर प्रदर्शन किया और एक वरिष्ठ पत्रकार को नामजद करते हुए शिकायती शपथ पत्र सौंपा है। हालांकि, मौके पर मौजूद पत्रकारों द्वारा योग्यता को लेकर तीखे सवाल पूछे जाने पर प्रदर्शनकारी संतोषजनक जवाब दिए बिना ही वहां से चलते बने। हाल ही में आजाद अधिकार सेना इकाई बांदा सीएमओ कार्यालय को एक शिकायती पत्र सौंपा गया था, जिसमें जिले के गांव-गली, कस्बों और शहरों में
धड़ल्ले से चल रहे अवैध क्लीनिकों और उनके संचालकों की डिग्री व रजिस्ट्रेशन की उच्चस्तरीय जांच कराकर कड़ी कार्रवाई की मांग की गई थी। इस पर संज्ञान लेते हुए सीएमओ कार्यालय डॉ. मदन द्वारा मीडिया को जानकारी दी गई थी कि मामले की बिंदुवार जांच के लिए एक उच्चस्तरीय कमेटी गठित की जा रही है।
जांच की खबर सामने आने के महज दो दिन के भीतर ही अवैध क्लीनिक चलाने के आरोपों से घिरे कथित डॉक्टरों की लंबी कतार गुरुवार को सड़कों पर उतर आई और नारेबाजी करते हुए जिला प्रशासन को ज्ञापन सौंपा। प्रदर्शनकारियों की ओर से राजकुमार पुत्र चुंकू, निवासी- गर्गन पुरवा, अतर्रा, बांदा द्वारा दिए गए शपथ पत्र में एक 72 वर्षीय बेदाग वरिष्ठ पत्रकार को नामजद करते हुए और दो अज्ञात का जिक्र कर धमकाने व अन्य गंभीर आरोप लगाए गए हैं। इसी शपथ पत्र के बिंदु संख्या-5 में यह भी स्वीकार किया गया है कि वे ष्अपने ज्ञान तथा अनुभव से समाज को प्राथमिक चिकित्सा और परामर्श उपलब्ध कराते हैं। जब कलेक्ट्रेट परिसर में प्रदर्शन करने पहुंचे इन कथित चिकित्सकों से पत्रकारों ने उनकी योग्यता डिग्री-डिप्लोमा को लेकर सवाल दागे, तो उनके पास कोई ठोस जवाब नहीं था। नेतृत्व कर रहे लोग सवालों से बचते नजर आए और मौके से खिसकते बने। इस पूरे घटनाक्रम को लेकर आम जनमानस और पत्रकारों में चर्चा है कि यह पूरी कवायद स्वास्थ्य विभाग द्वारा की जा रही निष्पक्ष जांच को प्रभावित करने और दबाव बनाने का एक प्रयास मात्र है।
नामजद किए गए 72 वर्षीय वरिष्ठ पत्रकार ने बातचीत में स्पष्ट किया है कि खबरें प्रकाशित करने से खुन्नस खाकर एक गिरोह के रूप में यह झूठी साजिश रची गई है। इस मामले में अतर्रा थाने में भी शिकायत दर्ज कराई गई है। फिलहाल, मामला जांच के घेरे में है। जांच पूरी होने के बाद जहां एक तरफ शपथ पत्र और लगाए गए आरोपों की हकीकत सामने आएगी, वहीं दूसरी ओर जिले में फल-फूल रहे अवैध क्लीनिकों और कथित डॉक्टरों की असलियत भी बेनकाब होगी। जनता का मानना है कि यदि प्रशासन निष्पक्षता से जांच करे, तो दूध का दूध और पानी का पानी अलग हो जाएगा।


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