शैलेन्द्र साहित्य सरोवर की 372 वीं साप्ताहिक रविवासरीय काव्य गोष्ठी संपन्न
फतेहपुर, मो. शमशाद । मुराइन टोला स्थित हनुमान मंदिर में शैलेन्द्र साहित्य सरोवर के बैनर तले 372 वीं साप्ताहिक रविवासरीय सरस काव्य गोष्ठी का आयोजन केपी सिंह कछवाह की अध्यक्षता व शैलेन्द्र कुमार द्विवेदी के संचालन में हुआ। मुख्य अतिथि के रूप में मंदिर के महंत स्वामी रामदास उपस्थित रहे। काव्य गोष्ठी का शुभारंभ करते हुए केपी सिंह कछवाह ने वाणी वंदना में अपने भाव प्रसून प्रस्तुत करते हुए कहा- सरस्वती मां शारदे, अज्ञान तम संहार दे। बुद्धि-मन निर्मल हृदय कर, ज्ञान का भंडार दे।। पुनः कार्यक्रम को गति देते हुए काव्य पाठ में कुछ इस प्रकार से अपने अंतर्भावों को प्रस्तुत किया- अगर दुख दर्द औरों का, कभी बांटा नहीं तुमने। तो है धिक्कार जीवन को, वृथा सब ही हुए सपने।। डा. सत्य नारायण मिश्र ने अपने भावों को एक छंद के माध्यम से कुछ इस प्रकार व्यक्त किया सुरभित वसंत, हे मधुवसंत! हैं तुमसे प्रमुदित दिग-दिगंत।। दिनेश कुमार श्रीवास्तव ने अपने
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रविवासरीय काव्य गोष्ठी में भाग लेते साहित्यकार। |
भावों को मुक्तक में कुछ इस प्रकार पिरोया गीधराज के घाव को, साफ कर रहे राम। अपनी कोमल जटा से, अतः जटायू नाम।। शिव सागर साहू ने काव्य पाठ किया दुनिया में संघर्ष की बहती अजब बयार। बिना संतुलित सोच के, लड़ने को तैयार।। प्रदीप कुमार गौड़ ने अपने क्रम में काव्य पाठ में कुछ इस प्रकार भाव प्रस्तुत किये जब वैवाहिक वर्षगांठ हो, काम करो शुभ, सुंदर, नेक। दृढ़ प्रतीति के प्रण प्रतीक का, मिलकर वृक्ष लगाओ एक।। विनय कुमार दीक्षित ने काव्यपाठ में अपने भावों को कुछ इस प्रकार से शब्द दिए हैं रहे तुझको सिखा, नीले गगन के सब सितारे। व्याधियां शत-शत रहें, पर तू कभी हिम्मत न हारे।। काव्य गोष्ठी के आयोजक एवं संचालक शैलेन्द्र कुमार द्विवेदी ने अपने भाव एक गीत के माध्यम से कुछ यों व्यक्त किये भारत माता की आश बनो, जग का नूतन विश्वास बनो। दीनों-दलितों बन पुकार, तुम बढ़ो नया इतिहास बनो।। कार्यक्रम के अंत में स्वामी जी ने सभी को आशीर्वाद प्रदान किया। आयोजक ने आभार व्यक्त किया।
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