सेनाध्यक्ष ने कहा दक्षिणा निश्चित मिलेगी
जहाँ मंत्र बने संकल्प, वहाँ विजय बने धर्म
चित्रकूट, सुखेन्द्र अग्रहरि । शब्द जहाँ मौन को भी संकल्प बना दें, वहीं राष्ट्रधर्म की गूंज आत्मा तक पहुँचे- ऐसा ही दृश्य बुधवार की संध्या तुलसी पीठ में दृष्टिगोचर हुआ। भारतीय थल सेना के प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी जब अपनी धर्मपत्नी श्रीमती सुनीता द्विवेदी संग पद्मविभूषण जगद्गुरु रामभद्राचार्य के चरणों में पहुंचे, तो वह केवल एक औपचारिक भेंट नहीं, अपितु राष्ट्रधर्म की एक नयी वेला का प्रारंभ था। जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने जगद्गुरु से दीक्षा ग्रहण करते हुए संकल्प लिया कि ऑपरेशन सिंदूर तब तक नहीं रुकेगा, जब तक आतंक का अंतिम बीज नष्ट न कर दिया जाए। स्पष्ट किया कि भारत पर किसी भी प्रकार के हमले का उत्तर इतना करारा होगा कि इतिहास उसे प्रतिशोध नहीं, धर्मयुद्ध कहेगा। इस पावन भेंट में जगद्गुरु ने भारतीय सेना के पराक्रम की मुक्तकंठ से प्रशंसा की
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| सेनाध्यक्ष को विशेष गदा देते जगदगुरू |
और सेना प्रमुख को एक विशेष गदा प्रदान करते हुए आशीर्वाद दिया- यही गदा बने उस विजय का प्रतीक, जो आतंक और अन्याय को चूर कर दे। वहीं, थल सेना प्रमुख ने भी जगद्गुरु को सेना का स्मृति-चिह्न अर्पित किया। यह गुरु-शिष्य परंपरा का अनुपम संगम था, जहाँ आध्यात्मिकता और राष्ट्रशक्ति का संगम गंगा-जमुनी भावभूमि पर घटित हुआ। जगद्गुरु ने पत्रकारों से बातचीत में बताया कि उन्होंने गुरु दक्षिणा में पीओके माँगा, जिस पर सेनाध्यक्ष ने दृढ़ता से कहा- यह दक्षिणा अवश्य प्राप्त होगी। जगद्गुरु ने यह भी बताया कि दीक्षा का वही मंत्र दिया गया, जो माता सीता ने हनुमान को लंका विजय हेतु प्रदान किया था।


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