देवेश प्रताप सिंह राठौर
वरिष्ठ पत्रकार
भारत उत्तर प्रदेश में कोरोना वायरस के कुल एक्टिव मामलों की संख्या 40 पहुंच गई है। सभी मरीज होम आइसोलेशन में हैं। इस बीच, कोरोना वायरस के नए वेरिएंट से आगरा में पहली मौत हुई है। IIT और BHU के प्रोफेसरों ने बताया कि अगर कोरोना की चौथी लहर आती है, तो उसका असर 21 से 28 दिन तक रहेगा ऐसा विशेषज्ञों का अनुमान है। कोरोना वायरस का का प्रकोप बहुत भयानक देख चुके हैं लोग, सरकार द्वारा दी गई गाइडलाइन का पालन करना सभी को अपनी जिम्मेदारी समझनी चाहिए। धीरे-धीरे कोरोनावायरस शुरुआती दौर में जिस तरह से संख्या में वृद्धि हो रही है मुझे लगता है अगर जांच प्रक्रिया हर जिले स्तर से की जाएगी तो कोरोना के मरीजों की संख्या बढ़ सकती है। लेकिन बचाव और सतर्कता आवश्यक है। बुंदेलखंड क्षेत्र में आने वाले लगभग सभी मेडिकल कॉलेज पर लापरवाही अधिक है, मुख्य डॉक्टर बहुत कम जाते हैं मरीज को देखने अपने वार्डो में, सिर्फ जो सिखने वाले छात्र हैं वही लगे रहते हैं, और जो विभाग अध्यक्ष और सहायक डॉक्टर हैं प्रमुख हैं वह नदारत रहते हैं, प्राइवेट प्रैक्टिस में तथा नर्सिंग होम स्वयं के उनके चल रहे हैं, उसमें बिजी रहते हैं लगभग सभी मेडिकल कॉलेज के डॉक्टरों का बुरा हाल है, वहीं पर जिला अस्पतालों में व्यवस्था कहीं-कहीं अच्छी है,सरकार को चाहिए बुंदेलखंड में व्यवस्थाओं पर पैनी नजर रखने की जरूरत है।
कोरोनावायरस के समय मे मैने मेडिकल कॉलेज में देखा है। जब कोरोनावायरस नहीं रहता है तब डॉक्टर नहीं देखते हैं मरीजों को समय से, कोरोनावायरस में कहां आएंगे,कोरोनावायरस में वर्दी और ड्रेस डॉक्टर की पहना देते थे, और कौन जाता था उन मरीजों को देखने और दवाई देने मुझे लिखने में अच्छा नहीं लग रहा है, लेकिन बहुत शर्म की बात है डॉक्टर लोग कोरोनावायरस के मरीजों को देखना कभी नहीं गए ऐसा मेरे पास बहुत से उदाहरण है। मेरे संज्ञान में बहुत से डॉक्टर ऐसे भी हैं जो कोरोनावायरस में अपनी जिम्मेदारियां को पूर्ण रूप से निभाया वह स्वयं कोरोनावायरस से ग्रस्त हो गए ऐसे भी मेरे पास नाम है, जो पूर्ण रूप से समर्पित रहे कोरोनावायरस में मरीजों के लिए ऐसे भी बहुत से डॉक्टर हैं। उत्तर प्रदेश के सरकार के मुखिया को चाहिए अस्पतालों पर विशेष ध्यान दें व्यवस्थाएं अभी भी बहुत खराब है। उत्तर प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री के ओएसडी से मेरी बात हुई कई मुद्दों पर लेकिन निष्कर्ष शून्य निकला समाधान होना वहां से संभव नहीं है, ऐसी स्थिति में सुधार होना कठिन विषय है। क्योंकि सब कुछ नीचे स्तर से लेकर ऊपर मंत्री तक चल रहा है। बहुत से डॉक्टर के ट्रांसफर हुए इधर से उधर जो अच्छे डॉक्टर थे जो मेहनत करते थे जिनका मरीज के साथ सीधा संबंध रहते थे, उन्हें हटा दिया गया मरीजों की तरफ से बहुत सारे पत्र भेजे गए परंतु उनका ट्रांसफर नहीं रुका बहुत सी चीज हैं मैं नहीं लिख सकता और उन्होंने सेवा से त्यागपत्र लेना उचित समझा और जो कुछ ट्रांसफर हुए वह अपनी पकड़ एवं अन्य संसाधनों के द्वारा ट्रांसफर रुकवा सके ऐसे भी बहुत से उदाहरण है मेरे पास परंतु भ्रष्टाचारी पूर्ण रूप से व्याप्त है।


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