चित्रकूट, सुखेन्द्र अग्रहरि । जिले में करोड़ों रुपये की लागत से निर्मित राजाघाट आज गंदगी और प्रदूषण के बोझ तले कराहता नजर आ रहा है। हालात इतने बदतर हैं कि जहां श्रद्धालुओं को आस्था के साथ स्नान और आचमन करना चाहिए, वहां बदबू, कचरा और प्रदूषित जल ने कदम रखना तक मुश्किल बना दिया है। घाट की सीढ़ियों के आसपास फैली गंदगी और पानी में तैरती पूजन सामग्री आस्था और स्वच्छता दोनों पर सवाल खड़े कर रही है। लंबे संघर्ष और मांग के बाद नगर पालिका द्वारा बनाए गए इस भव्य घाट की दुर्दशा अब लोगों को खटकने लगी है। इसी स्थिति को देखते हुए बुंदेली सेना ने घाट को स्वच्छ और निर्मल बनाने के लिए वृहद सफाई अभियान चलाने का लक्ष्य तय किया
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| गंदगी से पटाक्षेप राजाघाट |
है। संगठन के जिलाध्यक्ष अजीत सिंह के अनुसार घाट का निर्माण तो हो गया, लेकिन प्रदूषण पर लगाम लगाने की व्यवस्था नहीं की गई। पुलघाट की तरह यहां भी पूजन सामग्री विसर्जन के लिए अलग कुंड बनाए जाने की जरूरत है, ताकि नदी में सीधे कचरा न जाए। साथ ही इंटेक वेल के पास जोड़ी गई नाली से गिरने वाला गंदा पानी भी मंदाकिनी को और प्रदूषित कर रहा है, जिसे तत्काल दूसरी दिशा में मोड़ना जरूरी है। बुंदेली सेना ने आम लोगों से भी अपील की है कि वे आस्था के साथ-साथ जिम्मेदारी निभाते हुए नदी को स्वच्छ रखने में सहयोग करें।


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