बांदा, के एस दुबे । जनपद बांदा के रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड, प्रमुख बाजारों और सड़कों पर खुले आसमान के नीचे जिंदगी काटने को मजबूर बेसहारा बुजुर्गों, निराश्रित महिलाओं और मानसिक रूप से अस्वस्थ लोगों की स्थिति पर गहरा दुख जताते हुए इसे एक गंभीर मानवीय संकट बताया गया है। जनता दल यूनाइटेड की प्रदेश उपाध्यक्ष एवं बुंदेलखंड प्रभारी शालिनी सिंह पटेल ने इस संवेदनशील मुद्दे को लेकर मंडलायुक्त चित्रकूटधाम मंडल को एक ज्ञापन सौंपा है। उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि ऐसे असहाय लोगों के लिए तत्काल एक विशेष रेस्क्यू अभियान चलाकर उनका पुनर्वास किया जाए।
मंडलायुक्त को सौंपे गए ज्ञापन में शालिनी सिंह पटेल ने कहा कि जिले के विभिन्न सार्वजनिक स्थलों पर कई बुजुर्ग और लावारिस लोग भूख, गंभीर बीमारी और असुरक्षा के बीच जीने को विवश हैं। इसके अलावा, मानसिक रूप से अस्वस्थ लोग सड़कों पर भटक रहे हैं, जिससे उनके साथ कभी भी कोई बड़ी और अप्रिय दुर्घटना हो सकती है। ज्ञापन में इस बात का भी उल्लेख किया गया है कि इनमें से कई लोग ऐसे हैं जो वर्षों से अपने परिवारों से बिछड़े हुए हैं और अपनी पहचान खोकर बेहद उपेक्षित व नारकीय जीवन जी रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह स्थिति न केवल प्रशासनिक संवेदनशीलता पर सवालिया निशान लगाती है, बल्कि समाज की मानवीय जिम्मेदारी पर भी गंभीर प्रश्न खड़े करती है। जदयू नेता ने सभ्य समाज का हवाला देते हुए कहा कि किसी भी व्यक्ति को सड़क किनारे लावारिस जैसी जिंदगी जीने के लिए मजबूर नहीं होना चाहिए। उन्होंने कमिश्नर से मांग की है कि उनके लिए निःशुल्क भोजन, समुचित उपचार, मानसिक स्वास्थ्य जांच और आवश्यक देखभाल की पक्की व्यवस्था सुनिश्चित हो। शालिनी सिंह पटेल ने मंडलायुक्त से विशेष आग्रह किया कि इस रेस्क्यू अभियान को केवल एक या दो दिन की औपचारिकता तक सीमित न रखा जाए, बल्कि इसे नियमित रूप से संचालित किया जाए। इससे यह सुनिश्चित हो सकेगा कि भविष्य में कोई भी असहाय व्यक्ति भूख, बीमारी और प्रशासनिक उपेक्षा का शिकार होकर दम न तोड़े। ज्ञापन सौंपते समय उन्होंने स्पष्ट किया कि मानवता की रक्षा करना और समाज के अंतिम पायदान पर खड़े असहाय लोगों को सम्मानजनक जीवन दिलाना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है, और प्रशासन को इस दिशा में बेहद संवेदनशील और प्रभावी कदम उठाने चाहिए।


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