चित्रकूट, सुखेन्द्र अग्रहरि : गायत्री शक्तिपीठ में शांतिकुंज के मार्गदर्शन में आयोजित नारी उत्कर्ष प्रशिक्षण कार्यशाला का रविवार को समापन हुआ। कार्यक्रम में नारी सशक्तीकरण, संस्कार, संवेदनाओं और सामाजिक भूमिका पर वक्ताओं ने विचार रखे। कार्यशाला में समाज के विभिन्न क्षेत्रों से जुड़ी करीब 250 महिलाओं ने सहभागिता की। गायत्री शक्तिपीठ के संचालक डॉ. रामनारायण त्रिपाठी ने कहा कि नारी सृष्टि है और पुरुष उसकी रचना। नारी में उत्कर्ष और संवेदनाओं का जागरण ही श्रेष्ठ युग के निर्माण का आधार बनेगा। इसी उद्देश्य से गायत्री परिवार ने नारी उत्कर्ष को प्रमुखता दी है। जिला पंचायत अध्यक्ष कल्पना सोनकर ने कहा कि राजा राममोहन राय के बाद आचार्य पं. श्रीराम शर्मा आचार्य ने नारी की दशा और दिशा में बदलाव के लिए गायत्री परिवार के माध्यम से व्यापक प्रयास किया, जिसका प्रभाव समाज में दिखाई दे रहा है। शांतिकुंज प्रतिनिधि रश्मि जायसवाल ने कहा कि
विपरीत परिस्थितियों में नारी ने हमेशा साहस और त्याग का परिचय दिया है। डॉ. प्रमिला मिश्रा ने कहा कि भारतीय संस्कृति में संस्कारों के निर्माण में नारी की महत्वपूर्ण भूमिका है। नारी के करुणा, प्रेम और संवेदना जैसे गुण समाज में बढ़ेंगे तो सकारात्मक वातावरण बनेगा। दिव्या त्रिपाठी ने नारी उत्कर्ष कार्यक्रम को महिलाओं में आत्मविश्वास और जागरूकता बढ़ाने वाला प्रयास बताया। कार्यक्रम में सविता शिवहरे, संगीता करवरिया, रामजानकी शुक्ला, पुष्पा सिंह, रविमाला सिंह, सुधा तिवारी, अर्चना उपाध्याय, ममता द्विवेदी, अंजू वर्मा के साथ सहयोगी पुरुष डॉ. संतोष मिश्रा, राजेंद्र तिवारी, कमलाकांत उपाध्याय, के.के. त्रिपाठी, अनूप तिवारी, रामशरण शास्त्री, सुधीर द्विवेदी, जिला समन्वयक भावनदीन यादव, रामू खरे, प्रमोद पटेल, शिवम् द्विवेदी, रामलखन केसरवानी समेत अनेक महिलाएं और पुरुष सहयोगी मौजूद रहे।


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