चित्रकूट, सुखेन्द्र अग्रहरि : वर्तमान समय में भागदौड़ भरी जिंदगी और काम के बढ़ते दबाव के बीच तनाव और चिंता से राहत के लिए नियमित योग व प्राणायाम उपयोगी हो सकते हैं। रविवार को जिला मुख्यालय के कुबेरगंज निवासी योगाचार्य रमेश सिंह राजपूत ने भ्रामरी प्राणायाम के अभ्यास की विधि और संभावित लाभों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि प्रतिदिन 10 से 15 मिनट भ्रामरी प्राणायाम का अभ्यास करने से मन को शांत रखने, तनाव व घबराहट कम करने और नींद में सुधार में मदद मिल सकती है। नियमित अभ्यास से एकाग्रता और ध्यान केंद्रित करने की क्षमता बेहतर होती है। बताया कि भ्रामरी प्राणायाम के अभ्यास के लिए सर्वप्रथम ध्यानात्मक आसन में रीढ़ और गर्दन सीधी रखकर बैठें। इसके बाद षण्मुखी मुद्रा बनाकर तर्जनी बंद पलकों पर, मध्यमा नाशा छिद्रों पर, अनामिका
और कनिष्ठिका ऊपर नीचे के होठों पर और अंगूठे से कानों को कोमलता से बंद करें तथा नाक से धीरे सांस भरने के बाद भंवरे जैसी गुंजन करते हुए सांस छोड़ते है। अभ्यास के बाद करीब पांच मिनट आंखें बंद रखकर शांत अवस्था में बैठने की सलाह दी। योगाचार्य ने कहा कि अभ्यास के दौरान उंगलियों का दबाव हल्का और गुंजन सहज व लयबद्ध रखना चाहिए। किसी भी स्वास्थ्य समस्या में विशेषज्ञ की सलाह के बाद ही प्राणायाम करना उचित है। उन्होंने उच्च रक्तचाप से पीड़ित लोगों को किसी विशेषज्ञ की सलाह के अनुसार योगाभ्यास करने की सलाह दी।


No comments:
Post a Comment