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Tuesday, October 6, 2026

निःशुल्क स्वर्णप्राशन संस्कार शिविर का सफल आयोजन, बच्चों को शीत ऋतु में स्वास्थ्य सुरक्षा के उपाय बताए

कानपुर, प्रदीप शर्मा - वरिष्ठ आयुर्वेदाचार्य डॉ. वंदना पाठक के निर्देशन में आयोजित एक दिवसीय निःशुल्क स्वर्णप्राशन संस्कार शिविर का सोमवार को सफलतापूर्वक आयोजन किया गया। यह शिविर आरोग्य क्लिनिक, सी.एस.जे.एम. यूनिवर्सिटी स्वास्थ्य केंद्र, राजकीय बाल गृह, कल्याणपुर तथा राजकीय बालिका गृह, स्वरूप नगर में आयोजित हुआ। इस अवसर पर नेशनल इंटीग्रेटेड मेडिकल एसोसिएशन महिला फोरम, कानपुर की सचिव एवं आयुर्वेदाचार्य डॉ. वंदना पाठक द्वारा लगभग 140 बच्चों का निःशुल्क स्वर्णप्राशन संस्कार कराया गया। शिविर के दौरान बच्चों एवं उनके अभिभावकों को आगामी शीत ऋतु को ध्यान में रखते हुए उचित आहार-विहार, स्वच्छता, दिनचर्या एवं मौसमी स्वास्थ्य सावधानियों के संबंध में विस्तार से जानकारी दी गई।



स्वर्णप्राशन संस्कार का महत्व

स्वर्णप्राशन संस्कार के महत्व पर प्रकाश डालते हुए डॉ. वंदना पाठक ने बताया कि यह आयुर्वेद की एक महत्वपूर्ण पारंपरिक विधि है, जिसे बच्चों के स्वास्थ्य, रोग प्रतिरोधक क्षमता तथा शारीरिक एवं मानसिक विकास के लिए उपयोगी माना जाता है। यह भारतीय परंपरा में वर्णित 16 संस्कारों में से एक प्रमुख संस्कार है। उन्होंने कहा कि ऋतु परिवर्तन के समय बच्चों के स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता होती है। इस दौरान संतुलित आहार, पर्याप्त नींद, स्वच्छता एवं नियमित दिनचर्या का पालन आवश्यक है। स्वर्णप्राशन में प्रयुक्त औषधि स्वर्ण भस्म, वच, गिलोय, ब्राह्मी, गौघृत एवं मधु आदि द्रव्यों के समन्वय से तैयार की जाती है। उन्होंने कहा कि बच्चों को डांटना अथवा शारीरिक दंड देना उनके मानसिक स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकता है। इसलिए बच्चों का पालन-पोषण स्नेहपूर्ण, सुरक्षित एवं सकारात्मक वातावरण में किया जाना चाहिए।


शीत ऋतु में बच्चों की स्वास्थ्य सुरक्षा

आगामी शीत ऋतु में बच्चों के स्वास्थ्य के संबंध में जानकारी देते हुए डॉ. वंदना पाठक ने बताया कि तापमान में कमी एवं मौसम में बदलाव के कारण बच्चों में सर्दी, खांसी, जुकाम, गले में खराश तथा अन्य मौसमी समस्याएं देखने को मिल सकती हैं। ऐसे में बच्चों को ठंड से बचाने के साथ-साथ उनकी दिनचर्या एवं खान-पान पर विशेष ध्यान देना चाहिए। उन्होंने बताया कि सर्दियों में बच्चों को गर्म, ताजा एवं पौष्टिक भोजन देना चाहिए। भोजन में दाल, हरी एवं मौसमी सब्जियां, खिचड़ी, दलिया, रोटी, दूध तथा अन्य पौष्टिक खाद्य पदार्थों को शामिल किया जा सकता है। बच्चों को मौसमी फलों का सेवन भी कराया जाना चाहिए। भोजन हमेशा ताजा एवं स्वच्छ हो तथा अत्यधिक तले-भुने खाद्य पदार्थों एवं जंक फूड का सेवन सीमित रखा जाए। शीत ऋतु में गुनगुने पानी का सेवन करने की आदत लाभकारी हो सकती है। बच्चों को अत्यधिक ठंडे पेय पदार्थों एवं ठंडी चीजों के सेवन से बचाने के साथ पर्याप्त मात्रा में पानी एवं पौष्टिक तरल पदार्थ देना चाहिए। अभिभावकों को सलाह देते हुए उन्होंने कहा कि सुबह एवं शाम के समय तापमान अधिक कम होने पर बच्चों को उचित गर्म कपड़े पहनाएं। कपड़े मौसम के अनुकूल हों तथा बच्चों को अत्यधिक ठंड एवं अचानक तापमान परिवर्तन से बचाया जाए। कमरे में पर्याप्त वेंटिलेशन बनाए रखना भी आवश्यक है।


स्वच्छता एवं नियमित दिनचर्या पर जोर

शीत ऋतु में व्यक्तिगत स्वच्छता पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता बताते हुए उन्होंने कहा कि बच्चों को नियमित रूप से हाथ धोने, साफ कपड़े पहनने, व्यक्तिगत स्वच्छता बनाए रखने तथा घर एवं आसपास के वातावरण को स्वच्छ रखने की आदत डालनी चाहिए। सर्दियों में धूप निकलने पर बच्चों को उचित समय तक सुबह की हल्की धूप में बैठने एवं सक्रिय रहने के लिए प्रोत्साहित किया जा सकता है। डॉ. वंदना पाठक ने अभिभावकों से अपील की कि बच्चों में बीमारी के लक्षण दिखाई देने पर स्वयं से दवा देने के बजाय योग्य चिकित्सक की सलाह लें। उन्होंने कहा कि बच्चों के लिए संतुलित आहार, पर्याप्त नींद, नियमित दिनचर्या, शारीरिक सक्रियता एवं सकारात्मक पारिवारिक वातावरण उनके समग्र स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने “पौष्टिक आहार, गर्म कपड़े, स्वच्छता और स्वस्थ दिनचर्या—सर्दियों में बच्चों की बेहतर सेहत का आधार” का संदेश देते हुए अभिभावकों से मौसम के अनुरूप बच्चों की देखभाल करने की अपील की। इस अवसर पर बच्चों को मौसमी फल एवं जूस भी वितरित किए गए। कार्यक्रम में  सुमन, संगीता सचान, सिस्टर ऊषा, डॉ. अनुराग मिश्रा तथा आरोग्य क्लिनिक, लालबंगला के धर्मेंद्र, सावित्री, निशा एवं शेखर सहित अन्य लोग मौजूद रहे।

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