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Friday, June 20, 2025

1972 से चल रहे बस अड्डे पर प्रशासनिक बुलडोजर- जनहित या जमीन हित?

कानूनी प्रक्रिया को कुचलते अफसरशाही के पहिए 

बस अड्डा विवाद में कर्मचारियों ने खोला मोर्चा 

चित्रकूट, सुखेन्द्र अग्रहरि । धर्मनगरी में इन दिनों केवल मंदिरों में घंटियाँ नहीं, प्रशासन की मनमानी के खिलाफ गूंजता विरोध भी सुनाई दे रहा है। उत्तर प्रदेश रोडवेज कर्मचारी संघ ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को संबोधित करते हुए एक तीखा और तथ्यात्मक ज्ञापन चित्रकूटधाम मण्डल के आयुक्त को सौंपा है, जिसमें कर्वी स्थित पुराने बस अड्डे को जबरन खाली कराने की घटना को अवैध, अलोकतांत्रिक और जनविरोधी करार दिया गया है। ज्ञापन में कहा गया है कि कर्वी का अस्थायी बस अड्डा वर्ष 1972 से नियमित रूप से संचालित है, जिससे राज्य सरकार को हर महीने लाखों रुपये की आय होती है। लेकिन चौंकाने वाली बात यह है कि न नगर पालिका ने कोई वैध नोटिस प्रक्रिया पूरी की, न ही रोडवेज को पर्याप्त समय दिया गया, और प्रशासन की मदद से जबरन बस स्टैंड खाली करवा लिया गया। ज्ञापन में यह भी बताया गया है कि बस अड्डा स्थानांतरित होने से पहले प्रतिदिन 6-7 हजार यात्री यहां से यात्रा करते थे, जबकि अब नए स्थान पर केवल 1000 यात्री ही आ पा रहे हैं, जिससे राजस्व में भारी गिरावट

सीएम को संबोधित ज्ञापन आयुक्त को सौंपते रोडवेज कर्मचारी 

और आम जनता को बेइंतिहा परेशानी हो रही है। बड़ा सवाल यह है कि जब रोडवेज भी सरकार का ही विभाग है, तो एक सरकारी एजेंसी को दूसरी सरकारी एजेंसी के साथ नियमों के तहत काम क्यों नहीं करने दिया गया? यूनियन ने प्रशासन पर नियमविरुद्ध ताला जड़ने और जबरदस्ती करने का आरोप लगाते हुए इसे सरकारी तानाशाही और नीतिगत असहमति का नमूना बताया है। सवाल है कि जब प्रयागराज और कानपुर जैसे महानगरों में एक से अधिक बस अड्डे संचालित हो सकते हैं, तो चित्रकूट जैसे तीर्थस्थल में क्यों नहीं? और क्या जनहित को ताक पर रखकर, सिर्फ जमीन के लालच में लिया गया ये फैसला, किसी बड़े आर्थिक खेल का हिस्सा है? वहीं इस संबंध में एसडीएम ने बताया कि इसके पहले कई नोटिस दी जा चुकी है।


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