देवेश प्रताप सिंह राठौर
वरिष्ठ पत्रकार
अमेरिका वेनेज़ुएला में जिस तरह अपना कब्जा मजबूत कर रहा है, सारा खेल तेल का है जो स्थिति बन रही है, उस स्थिति को देखते हुए तीसरे विश्व युद्ध के आसार बन रहे हैं अगर वेनेज़ुएला के बीच में अमेरिका चीन रूस आपस में भिड़े तो विश्व युद्ध संभव है।अमेरिका और रूस के बीच जारी तनाव अब एक खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है, उत्तरी अटलांटिक महासागर में हफ्तों तक चले हाई-वोल्टेज ड्रामे के बाद अमेरिका ने रूस के झंडे वाले तेल टैंकर 'मरीनेरा' को सफलतापूर्वक जब्त कर लिया है. इस सैन्य कार्रवाई ने वैश्विक राजनीति में खलबली मचा दी है क्योंकि ऑपरेशन के दौरान रूसी नौसेना के युद्धपोत और पनडुब्बियां भी उसी क्षेत्र में मौजूद थीं l अमेरिका ने तेल
वाहक पोत में किया है, रूस ने अपनी परमाणु हथियारों से लैस समरीन को उसको छुड़ाने के लिए रवाना कर दिया है। स्थिति गंभीर है ट्रंप की विस्तार वादी नीति घातक बन रही है, अभी तक जितने भी अमेरिका ने अरब कंट्री और अन्य देशों में हमले किए जैसे इराक हो सीरिया हो वियतनाम हो आदि बहुत से देश है जहां पर अमेरिका ने अपनी दादागिरी की यह सब खेल खेल तेल का है, जिसका अब मुख्य युद्ध की स्थिति बन रही है, इस पर किस तरह से नियंत्रण हो सकेगा यह आने वाला समय में दिखाई देगा क्योंकि अमेरिका जो करता है वह उसके लिए अच्छा है और दूसरा करता है उसके लिए वह बुरा है यह नीत पतन की निति है। यह सुनिश्चित है कब यह समय बताएगा। अगर रूस अपने देश की सुरक्षा के लिए विस्तारवादी नीति अपनाता है तो गलत कर रहा है पूरा नाटो देश यूक्रेन रूस युद्ध में यूक्रेन की मदद कर रहा है। अगर अमेरिका विस्तारवादी नीति कर रहा है तो वह ठीक है क्योंकि वह विश्व की महाशक्ति में गिनती है। रूस और चीन और अन्य देशों को रूस का साथ देते हुए आगे बढ़ना चाहिए तभी अमेरिका की दादागिरी पर अंकुश लग सकेगा। नहीं इसी तरीके से हमले होते रहेंगे छोटा देश पर कब्जा और अपना नियंत्रण करता रहेगा। अब उन देशों को सोचना है जिनको अपना अस्तित्व बचाने के लिए आगे बढ़ाना है और अमेरिका के विरुद्ध रूस का साथ देना तभी विजय संभव है। क्योंकि सद्दाम हुसैन पर इराक पर हमला किस बहाने से किया और क्या आरोप लगाए और अन्य देशों पर भी हमले किए सत्यता से परे दादागिरी के तहत सब स्पष्ट दुनिया ने देखा इस पर अंकुश लगाने की जरूरत है।

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