चित्रकूट, सुखेन्द्र अग्रहरि । 21 फरवरी को आदर्श समायोजित शिक्षक शिक्षा मित्र वेलफेयर एशोसियेशन अध्यक्ष सर्वेश यादव ने बताया कि उत्तर प्रदेश में शिक्षामित्र योजना का आरंभ 1990 के दशक में हुआ। इसका उद्देश्य था सरकारी स्कूलों में शिक्षक संकट को दूर करना और बच्चों को निरंतर, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करना। शिक्षामित्र वे लोग हैं जिन्होंने दशकों तक सरकारी स्कूलों में दलित पोषित नवनिहालों की पढ़ाई का बोझ अल्प मानदेय और अस्थायी नियुक्ति पर उठाया। आरटीई लागू होने से पहले, एनसीटीई ने शिक्षामित्रों को दूरस्थ बीटीसी प्रशिक्षण दिलाया और उन्हें टीईटी से छूट दी। इसका उद्देश्य था कि अनुभवी शिक्षामित्रों को अपग्रेड शिक्षक के पद पर स्थायी रूप से नियुक्त किया जा सके और बच्चों की पढ़ाई में निरंतरता बनी रहे। लेकिन कुछ शिक्षामित्रों की महात्वाकांक्षा और राजनैतिक समावेश ने योजना की दिशा बदल दी, जिससे शिक्षामित्रों को अनेक चुनौतियों का
सामना करना पड़ा। वे लंबे समय तक स्थायी पद और उचित वेतन के लिए संघर्षरत रहे। नियमित शिक्षक और शिक्षामित्रों के बीच भेदभाव और असमानता भी देखने को मिली। इसके परिणामस्वरूप, शिक्षामित्र समय-समय पर धरने और आंदोलन करते रहे। ग्रामीण क्षेत्रों में उन्होंने बच्चों की पढ़ाई जारी रखने के लिए व्यक्तिगत कठिनाइयाँ झेली और शिक्षा व्यवस्था की रीढ़ की तरह काम किया। सरकार ने हाल ही में शिक्षामित्रों के वेतन में वृद्धि की है, जो निश्चित रूप से उनकी आर्थिक मददगार साबित होगी और उन्हें कुछ राहत देगी जिसके लिये योगी आदित्यनाथ और उनकी कैबिनेट बधाई की पात्र है। लेकिन वर्तमान महंगाई और जीवन यापन की बढ़ती लागत को देखते हुए यह वृद्धि पर्याप्त नहीं है। इसलिए सरकार को चाहिए कि शिक्षामित्रों को महंगाई से जुड़े उचित वेतनमान और स्थायी पद प्रदान किया जाए। साथ ही, उनके एनसीटीई प्रशिक्षण और अनुभव को ध्यान में रखते हुए उन्हें प्रशिक्षित शिक्षक का दर्जा दिया जाए। इससे न केवल शिक्षामित्रों का जीवन सुरक्षित होगा, बल्कि प्रदेश में शिक्षा की गुणवत्ता भी बेहतर होगी। जिला महामंत्री नन्द किशोर दीक्षित ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट और उच्च न्यायालय ने भी दस वर्ष से अधिक समय तक लगातार कार्य करने वाले कर्मचारियों के स्थायीकरण और उचित वेतन की दिशा में कदम उठाने का सुझाव दिया है। भविष्य में शिक्षामित्रों की भूमिका महत्वपूर्ण बनी रहेगी। यदि उन्हें स्थायी पद, उचित वेतन और सामाजिक सम्मान मिले, तो यह न केवल उनके जीवन को स्थिर करेगा, बल्कि प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था की गुणवत्ता में भी सुधार लाएगा। उन्होंने यह भी कहा हमें किसी सरकार विशेष का कहकर बदनाम न किया जाये हम उस सरकार के साथ हैं जो सरकार शिक्षामित्रों को सम्मान सहित जीने का अधिकार देगी।
वरिष्ठ शिक्षा मित्र नेता भाऊराम पटेल ने कहा यूपी के शिक्षामित्र केवल शिक्षक नहीं, बल्कि विद्यालयों की रीढ़ हैं। उनका स्थायीकरण और सम्मान न केवल न्यायसंगत है, बल्कि प्रदेश की शिक्षा प्रणाली को मजबूत करने के लिए भी अनिवार्य है योगी आदित्यनाथ की सरकार में शिक्षामित्र आज आगे बढ़ रहा है ये प्रसन्नता का विषय है।


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