होलिका दहन के बाद पहली बार मंगलवार को नहीं खेला गया रंग, सूतककाल का रहा असर
बुधवार और गुरुवार को पूरे जिले में जमकर होगी रगबाजी, पुलिस भी सुरक्षा के लिहाज से तैयार
बांदा, के एस दुबे । सोमवार की आधी रात के बाद जनपद में 1100 स्थानों पर होलिका दहन किया गया। शहर में 150 स्थानों पर होलिका जलाई गई। लेकिन खास बात यह रही कि पिछले वर्षों में होलिका दहन के बाद रंगबाजी का दौर शुरू हो जाता था, लेकिन अबकी बार चंदग्रहण और सूतककाल क चलते रंग नहीं खेला गया। बुधवार से रंगबाजी का सिलसिला शुरू होगा, जो गुरुवार तक चलेगा। पुलिस प्रशासन ने भी सुरक्षा व्यवस्था के लिहाज से सुरक्षा का खाका पहले ही खींच लिया है।
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| सोमवार की रात को धू-धूकर जलती होलिका और मौजूद लोग। |
सोमवार शाम से ही शहर और ग्रामीण क्षेत्रों में होलिका दहन की तैयारियां शुरू हो गई थीं। लोग पूजन सामग्री लेकर होलिका स्थलों पर पहुंचे और विधि-विधान से पूजा-अर्चना की। आधी रात के बाद होलिका धधकते ही वातावरण भक्तिमय हो गया। दहन के बाद लोगों ने एक-दूसरे को अबीर-गुलाल लगाकर होली की शुभकामनाएं दीं। बलखंडीनाका के राजू ने बताया कि हर साल की तरह इस बार भी पूरे मोहल्ले ने मिलकर होलिका दहन किया और अब चार फरवरी को रंग खेलेंगे। मुक्तिधाम रोड निवासी अधिवक्ता विशंभर ने कहा कि सूतक काल के कारण परंपराओं का पालन करते हुए रंग खेलने की तिथि बदली गई है। छोटी बाजार समेत विभिन्न स्थानों पर बच्चों में होली को लेकर खासा उत्साह है और वे चार फरवरी का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। आधी रात को पुलिस की मौजूदगी में विभिन्न स्थानों पर होलिका दहन किया गया। अकेले शहर में 150 से अधिक स्थानों पर होलिका जलाई गई।
डीएम जे. रीभा के निर्देश पर होलिका दहन स्थलों की साफ-सफाई कराई गई। संबंधित सफाई कर्मियों द्वारा स्थलों की विशेष सफाई कर चूना डाला गया था। जैसे-जैसे रात गहराती गई वैसे-वैसे होलिका दहन स्थलों पर लोगों की भीड़ जुटी। होलिका दहन के दौरान किसी भी प्रकार की अव्यवस्था न हो, इसके लिए पुलिस प्रशासन मुस्तैद रहा। शहर और ग्रामीण इलाकों में थाना पुलिस लगातार गश्त करती रही। कुछ स्थानों पर हुड़दंग जैसी स्थिति बनने पर पुलिस ने लोगों को समझाकर वहां से हटाया। पीआरवी 112 की टीमें भी लगातार क्षेत्र में भ्रमण करती रहीं। होलिका दहन के साथ ही अब पूरे जिले में चार और पांच फरवरी को रंगोत्सव की तैयारियां तेज हो गई हैं और लोगों में होली को लेकर उत्साह बना हुआ है। अब बुधवार से रंग खेला जाएगा यह गुरुवार तक चलेगा। सुरक्षा के लिहाज से पुलिस फोर्स को तैनात कर दिया गया है। सभी थाना प्रभारी और पुलिस कर्मी अपने-अपने प्वाइंटों पर तैनात रहेंगे। एसपी पलाश बंसल ने लोगों से अपील की है कि कहीं भी किसी प्रकार की विवादित स्थिति बनने पर तत्काल मुकामी पुलिस को सूचना दें।
अपराधियों पर रहेगी पैनी निगाह
बांदा। एसपी पलाश बंसल ने कहा कि होली पर्व के मौके पर किसी भी प्रकार की अव्यवस्था नहीं होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि नशे में या फिर विवादित स्थितियां बनाकर उपद्रव करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने जनता से अपील की है कि रंगों का त्योहार होली शांतिपूर्ण तरीके से मनाएं। किसी भी तरह से कानून हाथ में लेने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
अलर्ट मोड पर रहेंगी 102 और 108 एंबुलेंस
बांदा। मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. विजेंद्र कुमार ने बताया कि होली पर्व पर होने वाले किसी प्रकार के बवाल, मारपीट, आगजनी या अन्य मामलों को लेकर 102 व 108 एंबुलेंसों को अलर्ट मोड पर रखा जाएगा। उन्होंने कहा कि होलिका दहन के साथ ही सभी एंबुलेंस चालक और ईएमटी अपनी ड्यूटी पर मुस्तैद रहेंगे। उन्होंने कहा कि सूचना मिलने के 10 मिनट के अंदर ईएमटी और चालक एंबुलेंस लेकर मौके पर पहुंचेंगे। इसके साथ ही तत्काल मरीज को संबंधित स्वास्थ्य केंद्र या फिर जिला अस्पताल पहुंचाएंगी। होली पर्व के दौरान गर्भवती महिलाओं को अस्पताल तक पहुंचाने के लिए 102 एंबुलेंस सेवा को अलर्ट मोड पर रखा जाएगा। उन्होंने कहा कि सूचना के 10 मिनट के अंदर एंबुलेंस संबंधित जगह पर पहुंचकर प्रसूता को अस्पताल पहुंचाने का काम करेंगी। इस कार्य में लापरवाही क्षम्य नहीं होगी। इधर, आपातकालीन सेवाओं के लिए 108 सेवा की 23 एंबुलेंस संचालित की जा रही हैं। इसके साथ ही गर्भवती महिलाओं व नवजात शिशुओं के लिए 102 सेवा की 21 एंबुलेंस हैं। यह सभी एंबुलेंस 24 घंटे उपलब्ध रहती हैं और जिले में स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए प्वाइंट भी निर्धारित किए गए हैं। ट्रामा सेंटर में दो एंबुलेंस मौजूद रहेंगी। इसके साथ ही सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में भी एक-एक एंबुलेंस तैनात रहेगी। इनके अलावा सभी निर्धारित प्वाइंटों पर भी एंबुलेंस तैनात रहेंगी। ताकि सूचना मिलने के तत्काल बाद एंबुलेंस मौके पर पहुंच सके।
हर्बल रंगों से खेलें होली, केमिकल वाले रंगों का न करें इस्तेमाल
- फूलों की होली खेलें और स्वस्थ रहें, लापरवाही से हो सकता है नुकसान
बांदा। होली पर्व को लेकर बाजारों में अबीर-गुलाल के साथ केमिकल से बने रंगों की भरमार है। होली का त्योहार नजदीक आते ही जिले के बाजारों में केमिकल और मिलावटी रंगों की बिक्री तेज हो गई है। शहर और कस्बों की दुकानों पर बिक रहे इन रंगों से त्वचा और आंखों को नुकसान का खतरा बढ़ गया है। डॉक्टरों और जानकारों ने लोगों को हर्बल गुलाल और अबीर का ही प्रयोग करने की सलाह दी है, क्योंकि जरा सी लापरवाही होली की खुशियों को बीमारी में बदल सकती है। शहर के विभिन्न बाजारों में रंग की दुकानें सजकर तैयार हैं। दुकानदार ग्राहकों को आकर्षित करने के लिए पिचकारियों पर छूट और रंगों की कई वैरायटी पेश कर रहे हैं। बाजार में रंग 30 रुपये से लेकर 100 रुपये तक 100 ग्राम के पैकेट में उपलब्ध हैं। वहीं अबीर और गुलाल 20 रुपये से लेकर 60 रुपये तक के सौ ग्राम के पैकेट में बिक रहे हैं। इसके साथ ही स्प्रे, महकदार स्प्रे और विभिन्न प्रकार के रंग भी बिक्री के लिए उपलब्ध हैं। विशेषज्ञों के अनुसार मिलावट और केमिकल युक्त रंगों के प्रयोग से त्वचा संबंधी विकार, चेहरे पर दाने, खुजली और एलर्जी की समस्या हो सकती है। कई घुलने वाले रंगों में रेत की मिलावट भी पाई जाती है, जिससे त्वचा खराब होने की पूरी संभावना रहती है। ऐसे में रंग खरीदते समय सावधानी बरतना जरूरी है और जहां तक संभव हो, अबीर का ही प्रयोग करना चाहिए। शहर के आईटीआई रोड निवासी अभिषेक, गोलू और रमेश कुमार का कहना है कि होली में अबीर का विशेष महत्व होता है। वह रंगों से दूरी बनाकर रखते हैं और बच्चों को भी ज्यादा से ज्यादा अबीर से ही होली खेलने की सलाह देते हैं। इधर, ट्रामा सेंटर ईएमओ डॉ. विनीत सचान ने लोगों को हर्बल गुलाल से ही होली खेलने की सलाह दी है। उन्होंने कहा कि यदि गुलाल में रगड़ या कड़ापन महसूस हो तो उसका इस्तेमाल न करें। रासायनिक रंगों से त्वचा को नुकसान पहुंच सकता है और श्वास एवं एलर्जी की बीमारी हो सकती है। रंग आंखों में चले जाने पर आंखें लाल हो जाती हैं और कई बार आंखों की रोशनी तक जा सकती है। उन्होंने सलाह दी कि रंग खेलने से पहले शरीर पर तेल या नमी वाली क्रीम जरूर लगाएं, जिससे रंगों का असर कम हो सके।


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