बांदा, के एस दुबे । भारतीय जनता पार्टी की जिला कार्यकारिणी की घोषणा होते ही जनपद की राजनीतिक सरगर्मी बढ़ गई है। सूची जारी होने के कुछ ही समय बाद सोशल मीडिया पर भारी असंतोष देखने को मिला। पार्टी के कई कार्यकर्ताओं और समर्थकों ने खुलकर अपनी नाराजगी जाहिर की। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर नई कार्यकारिणी की तुलना “परिवार रजिस्टर की नकल” से करते हुए तंज कसे जा रहे हैं। वहीं, कुछ पोस्ट्स में यह आरोप भी लगाए गए हैं कि सत्ता से जुड़े एक प्रभावशाली नेता के करीबी लोगों को प्रमुख पदों पर आसीन किया गया है। इन आरोपों के चलते संगठन के भीतर खींचतान खुलकर सामने आने लगी है।
पार्टी के कई वरिष्ठ और लंबे समय से जुड़े समर्पित कार्यकर्ताओं ने भी नई सूची पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि संगठन में वर्षों से सक्रिय और जमीनी स्तर पर काम करने वाले कार्यकर्ताओं की अनदेखी की गई है। कुछ कार्यकर्ताओं ने तो अपने पुराने दायित्वों और योगदान का ब्यौरा सार्वजनिक करते हुए जवाबदेही की मांग तक शुरू कर दी है। वहीं कई कार्यकर्ताओं ने इस सूची को 2027 के चुनावों के लिए घातक बताया है, तो कुछ ने इसे पक्षपातपूर्ण करार देते हुए सिरे से खारिज कर दिया। इससे संगठन के भीतर असंतोष और अधिक गहराता नजर आ रहा है।
इस बीच वरिष्ठ भाजपा नेता दीपक गुप्ता ने भी तीखी प्रतिक्रिया देते हुए इसे भाजपा की आधिकारिक सूची के बजाय “एक नेता की लिस्ट” करार दिया है, जिससे विवाद और गहरा गया है। जिला कार्यकारिणी की सूची सामने आते ही विवाद ने तूल पकड़ लिया और देखते ही देखते यह मुद्दा सोशल मीडिया पर ट्रेंड करने लगा। समर्थकों के बीच तीखी बहसें जारी हैं, जिससे पार्टी की अंदरूनी स्थिति को लेकर भी चर्चाएं तेज हो गई हैं। हालांकि, पार्टी के आधिकारिक स्तर पर अभी तक इस पूरे मामले पर कोई स्पष्ट प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। लेकिन जिस तरह से असंतोष खुलकर सामने आ रहा है, उससे यह साफ है कि आने वाले दिनों में संगठन को इस स्थिति को संभालने के लिए ठोस कदम उठाने पड़ सकते हैं।


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