लाखों रुपये गये गम्भीर सवालों के घेरे में
बांदा, के एस दुबे । उत्तर प्रदेश के बांदा जिले में 45 डिग्री से अधिक तप रही भीषण गर्मी ने जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित कर दिया है। कमासिन ब्लॉक की ग्राम पंचायत मवई में पेयजल संकट विकराल रूप धारण कर चुका है। पिछले 15 दिनों से सरकारी हैंडपम्प खराब पड़े हैं, जिससे ग्रामीण, राहगीर और श्रद्धालु बूंद-बूंद पानी को तरस रहे हैं। पंचायत भवन के ठीक सामने और कनका देवी मंदिर तथा जोगनी माता के पास सड़क किनारे के हैंडपम्प जर्जर हालत में है। प्रतिदिन सैकड़ों श्रद्धालु जल चढ़ाने आते हैं, भंडारे लगते हैं, यात्री प्रतीक्षालय में लोग रुकते हैं, लेकिन प्यासे ही लौट जाते हैं। ग्रामीणों का कहना है, प्रधान-सचिव की लापरवाही से लाखों रुपये मरम्मत के नाम पर बह गये, कागजों पर तो सब ठीक दिखता है, लेकिन हकीकत चिंताजनक है।
गाँव के एक ब्यक्ति ने नाम न उजागर करने की शर्त पर बताया कि हैंडपम्प मरम्मत के नाम पर कागजों में लाखों रुपये की मरम्मत दिखाई जा रही है। जिसमें हैंडपम्प मरम्मत सामग्री के नाम पर 17 मार्च 2026 को 44,394 और 42,359, और 49,930 रुपये तथा 17 दिसम्बर 2025 को 90,000 और 13,000 और 70,000 तथा 3 नवम्बर 2025 को 56,000 और 40,100 रुपये तथा 6 अगस्त को 19,995 और 19,990 रुपये का भुगतान किया गया है इसी तरह इसके पहले भी भारी भरकम धनराशि का भुगतान किया गया। लेकिन धरातल पर आज भी हैंडपम्प खराब पडे है, लोगों ने बताया कि जोगनी माता के पास का हैंडपम्प तो लगभग साल डेढ साल से खराब पडा है। अब प्रधान और पंचायत सचिव पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। क्या पंचायत भवन खुलता भी है? अधिकारी आते हैं तो इस प्रमुख स्थान पर खराब हैंडपम्प पर ध्यान क्यों नहीं? यदि धनराशि खर्च हो रही है तो हैंडपम्प खराब क्यों पडे है। ग्रामीणों ने तत्काल मरम्मत और जांच की मांग की है।


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