कानपुर, प्रदीप शर्मा - चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, कानपुर के कृषि अभियांत्रिकी महाविद्यालय के पूर्व अधिष्ठाता डॉ. एन. के. शर्मा ने अंतरराष्ट्रीय मंचों पर 22 एवं 23 अप्रैल को बेंगलुरु में आयोजित 15 वीं अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी में उन्होंने वर्चुअल रूप से मुख्य वक्ता के रूप में भाग लिया। इस दौरान उन्होंने अभियांत्रिकी एवं प्रौद्योगिकी के रैंसमवेयर जैसे साइबर खतरों के बारे में बताते हुए कहा कि रैंसमवेयर एक प्रकार का दुर्भावनापूर्ण सॉफ्टवेयर है, जो डिजिटल डेटा को बंधक बना लेता है। इससे बचाव के लिए संदिग्ध ईमेल, वेबसाइट और अनधिकृत डाउनलोड से सतर्क रहने की आवश्यकता है। इसके अतिरिक्त, 23 अप्रैल को हिंदुस्तान एग्रीकल्चर एवं वेलफेयर सोसाइटी द्वारा आयोजित 30 दिवसीय अंतरराष्ट्रीय विंटर स्कूल ट्रेनिंग कम सर्टिफिकेट कार्यक्रम में डॉ. शर्मा ने आमंत्रित वक्ता के रूप में ऑनलाइन मौजूद रहे। यह कार्यक्रम उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनन्दीबेन पटेल एवं
गुजरात के राज्यपाल आचार्य देवव्रत की अध्यक्षता में आयोजित किया गया। उन्होंने हरित ऊर्जा आधारित कृषि की अवधारणा पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि कृषि क्षेत्र में सौर ऊर्जा सहित वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों का एकीकरण अब आवश्यक हो गया है। केंद्र सरकार की योजनाओं के माध्यम से सौर पंपों की स्थापना में निरंतर वृद्धि हो रही है, जिससे किसानों की ऊर्जा निर्भरता कम हो रही है। डॉ.शर्मा ने एग्रीवोल्टाइक तकनीक का उल्लेख करते हुए बताया कि इसके उपयोग से भारतीय किसानों की आय में लगभग 35 प्रतिशत तक की वृद्धि दर्ज की गई है। उन्होंने कहा कि यह परिवर्तन किसानों को केवल अन्न उत्पादक ही नहीं, बल्कि ऊर्जा उत्पादक बनने की दिशा में भी अग्रसर कर रहा है।उन्होंने कहा कि कृषि विश्वविद्यालयों के अधीन स्थापित कृषि विज्ञान केंद्र किसानों को हरित ऊर्जा तकनीकों के प्रति जागरूक करने और “लैब टू लैंड” दृष्टिकोण को सशक्त बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।

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