चित्रकूट, सुखेन्द्र अग्रहरि : धर्मनगरी स्थित राष्ट्रीय रामायण मेला परिसर में चल रहे श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान सप्तह यज्ञ के दूसरे दिन शनिवार को कथा व्यास डॉ. श्याम सुंदर पाराशर ने भक्तों को भीष्म स्तुति एवं राजा परीक्षित के जन्म प्रसंग का भावपूर्ण वर्णन सुनाया। कथा के दौरान उन्होंने कहा कि मर्यादा पुरुषोत्तम प्रभु श्रीराम वनवास काल में चित्रकूट आए थें। यहां उन्होंने संतों का उत्पीड़न करने वाले दुष्टों का संघार किया था। अयोध्या से चित्रकूट आने के बाद उस समय के यहां के संत अत्रि मुनि, सुतीक्ष्ण मुनि, सरभंग ऋषि समेत सभी संतों को प्रभु श्रीराम ने दिव्य दर्शन दिए थे। ऐसे में चित्रकूट के हर कण में भगवान का वास माना जाता है। यहां से दण्डकारण्य जाकर उन्होंने राक्षसों का विनाश किया था। प्रसंग का उल्लेख करते हुए बताया कि महाभारत युद्ध के उपरांत जब भीष्म पितामह शरशय्या पर
थे, तब उन्होंने भगवान श्रीकृष्ण की स्तुति कर धर्म, सत्य और भक्ति का संदेश दिया। उन्होंने बताया कि सच्चे मन से प्रभु की भक्ति करने वाला व्यक्ति जीवन के हर संकट से पार पा सकता है। कथावाचक ने राजा परीक्षित के जन्म प्रसंग का वर्णन करते हुए बताया कि भगवान श्रीकृष्ण की कृपा से ही अश्वत्थामा के ब्रह्मास्त्र से उत्तरा के गर्भ में पल रहे बालक परीक्षित की रक्षा हुई थी। भगवान की कृपा से जन्मे परीक्षित आगे चलकर महान धर्मपरायण राजा बने। कहा कि संतों की युक्ति से जीव को मुक्ति मिलती है। कथा के दौरान भजन-कीर्तन से पूरा पंडाल भक्तिमय हो उठा। श्रद्धालुओं ने कथा श्रवण कर धर्म लाभ प्राप्त किया। इस मौके पर तुलसीपीठ के उत्तराधिकारी आचार्य रामचन्द्र दास, राष्ट्रीय रामायण मेला के कार्यकारी अध्यक्ष प्रशांत करवरिया, यजमान दिल्ली के डिप्टी पुलिस कमिश्नर अभिषेक मिश्रा, महेंद्र मिश्रा, आनंद सिंह पटेल, डॉ. संतोष, ज्ञान चंद्र, आनंद मिश्रा आदि मौजूद रहे।
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