बांदा, के एस दुबे । आगामी मानसून और वर्षाकाल के मद्देनजर जनपद में बाढ़ से पूर्व की तैयारियों को पुख्ता करने के लिए कलेक्ट्रेट सभागार में एक महत्वपूर्ण बैठक संपन्न हुई। जिलाधिकारी अमित आसेरी की अध्यक्षता में आयोजित इस बाढ़ स्टीयरिंग ग्रुप की बैठक में सभी संबंधित विभागों को समय रहते अपनी तैयारियां पूरी करने के कड़े निर्देश दिए गए हैं। बैठक में मुख्य रूप से अपर जिलाधिकारी (वि./रा.) कुमार धर्मेंद्र, अपर पुलिस अधीक्षक शिवराज सहित सभी संबंधित विभागों के जिला स्तरीय अधिकारी मौजूद रहे।तटबंधों की मरम्मत और फाटकों को ठीक करने के निर्देश जिलाधिकारी ने सिंचाई विभाग को अलर्ट पर रहने के निर्देश देते हुए कहा कि बाढ़ निरोधक कार्यों के अंतर्गत सभी क्षतिग्रस्त स्थलों और तटबंधों की तत्काल जांच की जाए। अधिशासी अभियंता (सिंचाई प्रखंड तृतीय, बांदा) को वर्षा से पूर्व बांधों के फाटकों को दुरुस्त करने और तटबंधों की मरम्मत का कार्य हर हाल में पूरा
करने को कहा गया है। रात्रि के समय संवेदनशील स्थानों पर कर्मचारियों की ड्यूटी लगाने और जनरेटर की पर्याप्त व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। अधिशासी अभियंता केन नहर प्रखंड को जल प्लावन की स्थिति को देखते हुए नहर की पटरियों को ठीक करने और तत्काल श्बाढ़ नियंत्रण कक्षश् स्थापित करने के निर्देश दिए गए। जल निकासी और अधूरे पुलों का काम पूरा किया जाये।सड़कों पर जलभराव की स्थिति से निपटने के लिए पीडब्ल्यूडी को निर्देशित किया गया है। जो सड़कें वर्तमान में निर्माणाधीन हैं या जिन सड़कों पर पिछले वर्षों में जलभराव हुआ था, वहां जल निकासी की समुचित व्यवस्था की जाए। वर्षा ऋतु के प्रारंभ होने से पहले जनपद के सभी निर्माणाधीन पुल, पुलिया और रपटों का निर्माण कार्य अनिवार्य रूप से पूर्ण करा लिया जाए।नाला सफाई और कूड़ा हटाने का अभियान जलभराव और संक्रामक बीमारियों को रोकने के लिए नगर और ग्रामीण क्षेत्रों में विशेष सफाई अभियान चलाने के निर्देश दिए गए हैं।शहरी क्षेत्रों में समस्त अधिशासी अधिकारी और ग्रामीण क्षेत्रों में खंड विकास अधिकारी नाले और नालियों की सघन सफाई सुनिश्चित कराएंगे। वर्षाकाल से पहले शहरों और कस्बों में लगे कूड़े के ढेरों को पूरी तरह से हटवाया जाए। ग्रामीण क्षेत्रों में जलभराव वाले स्थानों को चिन्हित कर नई नालियों का निर्माण कराने की जिम्मेदारी बीडीओ को सौंपी गई है।बाढ़ चौकियों की मैपिंग और नाविकों की व्यवस्था बाढ़ के दौरान राहत कार्यों में कोई देरी न हो, इसके लिए प्रशासनिक अमले को चाक-चौबंद रहने को कहा गया है। सभी उप जिलाधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में बाढ़ चौकियों को चिन्हित कर कार्य योजना तैयार करें। साथ ही, बाढ़ की संभावना वाले गांवों की समय से मैपिंग पूरी कर ली जाए। तहसील स्तर पर बैठकें आयोजित कर नाविकों और मोटर बोट की उपलब्धता की समुचित व्यवस्था पहले से तय कर ली जाए। तहसील, ब्लॉक और न्याय पंचायत स्तर पर श्बाढ़ समितियोंश् का गठन किया जाए। सभी बाढ़ चौकियों के सत्यापन की विस्तृत रिपोर्ट बाढ़ नियंत्रण कक्षऔर प्रभारी दैवीय आपदा अधिकारी को तत्काल प्रेषित की जाए। बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में ढीले तारों को तत्काल ठीक किया जाए। जिन क्षेत्रों में जलभराव की स्थिति उत्पन्न हो, वहां दुर्घटना से बचने के लिए तुरंत बिजली काटने की व्यवस्था हो।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी को बाढ़ प्रभावित और संवेदनशील इलाकों के लिए आवश्यक दवाइयों की उपलब्धता सुनिश्चित करने तथा कीटनाशक दवाओं के छिड़काव के निर्देश दिए गए हैं।जिला कृषि अधिकारी को वर्षाकाल से पूर्व पशुओं के लिए पर्याप्त मात्रा में भूसा एकत्र करने की जिम्मेदारी दी गई है। बाढ़ से बचाव और राहत कार्यों में किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। सभी विभाग आपसी समन्वय बनाकर काम करें ताकि आम जनमानस को किसी भी अप्रिय स्थिति का सामना न करना पड़े।


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