जिलाधिकारी से पीड़ित पिता ने दर्ज कराई शिकायत
बांदा, के एस दुबे । मैंने बच्चों को शिक्षित होने के लिये विद्यालय भेजा था, मजदूर बनाने के लिये...यह पीड़ा एक पिता ने शिकायत कर जिला प्रशासन से दर्ज कराई और कहा कि मेरे दोनों बच्चों से विद्यालय प्रबंध तंत्र के द्वारा पढ़ाई न कराकर बालू ढुलवाने का काम लिया जा रहा है। गौरतलब हो कि पीड़ित महेन्द्र लोहिया पुत्र रामपाल निवासी ग्राम अछरौड़ ने जिला प्रशासन से न्याय की गोहार लगाते हुये कहा है कि मेरे दो छोटे बच्चे रियांश लोहिया (कक्षा-2) और रियांशी लोहिया (कक्षा-5), कम्पोजिट विद्यालय अछरौंड़ में शिक्षा ग्रहण करने जाते हैं, विद्यालय प्रबंधन के द्वारा बच्चों को शिक्षित करने के बजाए उनको मजदूर बनाने का काम किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि गत 30 अप्रैल अप्रैल को एक वीडियो सामने आया जिसमें मेरे दोनों मासूम बच्चे और उनके साथ कुछ अन्य छात्र
![]() |
| ‘शिक्षित होने गये थे बच्चे, शिक्षक ने मजदूर बना दिया’ |
छात्र स्कूल परिसर में बालू ढोते हुए नजर आ रहे हैं। वीडियो में स्पष्ट दिख रहा है कि एक बच्चा फावड़े से बालू भर रहा है और मेरी बेटी तसला लेकर उसे डाल रही है। सरकार ने 6 से 12 वर्ष के बच्चों के लिए बाल श्रम को अपराध घोषित किया है, लेकिन यहाँ शिक्षा के मंदिर में ही गुरुओं द्वारा बच्चों को मजदूर बनाया जा रहा है। शिक्षक अपनी जेब भरने और मजदूरी का पैसा बचाने के चक्कर में मासूमों से पत्थर और बालू उठवा रहे हैं। पीड़ित पिता ने जिलाधिकारी से मांग करते हुये कहा है कि ऐसी दोषी अध्यापकों के विरुद्ध दण्डात्मक कार्यवाही की जाये। अगर गरीब के बच्चों की जगह मजदूरी का पाठ पढ़ाया जायेगा तो देश के इस भविष्य का क्या होगा।


No comments:
Post a Comment