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Saturday, June 20, 2026

धर्म परिवर्तन केस में बड़ा मोड़ मंसूब अहमद को मिली जमानत

वरिष्ठ अधिवक्ता जावेद खान व शोएब खान की प्रभावी दलीलों से मिली राहत

एक लाख के मुचलके पर जमानत मंजूर, गवाहों को  प्रभावित न करने समेत कई शर्तें लागू

फतेहपुर, मो शमशाद । जनपद के बहुचर्चित धर्म परिवर्तन मामले में शनिवार को उस समय बड़ा कानूनी घटनाक्रम सामने आया, जब अपर सत्र न्यायाधीश/एफटीसी कोर्ट संख्या-1, फतेहपुर ने आरोपी मंसूब अहमद की जमानत याचिका स्वीकार करते हुए उसे निर्धारित शर्तों के साथ रिहा किए जाने का आदेश पारित कर दिया। कोर्ट के इस फैसले के बाद मामला एक बार फिर सुर्खियों में आ गया है। गौरतलब है कि थाना खखरेरू में दर्ज मुकदमा अपराध संख्या-84/2026 में मंसूब अहमद पर एक युवती को प्रेम संबंधों के जाल में फंसाने, उसका अश्लील वीडियो बनाने, धमकी देने तथा धर्म परिवर्तन के लिए दबाव बनाने जैसे गंभीर आरोप लगाए गए थे। मामले की गंभीरता को देखते हुए आरोपी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की विभिन्न धाराओं के अलावा उत्तर प्रदेश विधि

वरिष्ठ जावेद खान व शोएब खान एडवोकेट

विरुद्ध धर्म संपरिवर्तन प्रतिषेध अधिनियम के तहत भी कार्रवाई की गई थी। जमानत अर्जी पर हुई सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता जावेद खान और अधिवक्ता शोएब खान ने अदालत में मजबूती के साथ अपना पक्ष रखा। उन्होंने मुकदमे के तथ्यों, उपलब्ध साक्ष्यों, केस डायरी तथा विभिन्न न्यायिक दृष्टांतों का हवाला देते हुए आरोपी को जमानत दिए जाने की मांग की। बचाव पक्ष ने तर्क दिया कि मामले के सभी पहलुओं को निष्पक्ष रूप से देखा जाना आवश्यक है और आरोपी को जमानत का लाभ दिया जाना चाहिए। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और उपलब्ध अभिलेखों का अवलोकन करने के बाद न्यायालय ने आरोपी को राहत प्रदान करते हुए जमानत मंजूर कर ली। अदालत ने आदेश दिया कि मंसूब अहमद को एक लाख रुपये के निजी मुचलके तथा समान धनराशि के दो जमानतदार प्रस्तुत करने पर रिहा किया जाए। हालांकि अदालत ने जमानत के साथ कई महत्वपूर्ण शर्तें भी लगाई हैं। न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि आरोपी को प्रत्येक सुनवाई पर अनिवार्य रूप से उपस्थित रहना होगा, किसी भी गवाह या साक्ष्य को प्रभावित करने का प्रयास नहीं करना होगा, मुकदमे की सुनवाई में अनावश्यक विलंब नहीं करना होगा तथा अदालत की पूर्व अनुमति के बिना देश से बाहर नहीं जाना होगा।

कोर्ट के इस आदेश के बाद अधिवक्ता समुदाय में वरिष्ठ अधिवक्ता जावेद खान और अधिवक्ता शोएब खान की प्रभावी पैरवी चर्चा का विषय बनी हुई है। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि दोनों अधिवक्ताओं ने मामले के कानूनी और तथ्यात्मक पक्ष को मजबूती के साथ न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत कर अपने मुवक्किल को महत्वपूर्ण राहत दिलाने में अहम भूमिका निभाई। धर्म परिवर्तन से जुड़े इस चर्चित मामले में जमानत मिलने के बाद अब सभी की निगाहें आगामी न्यायिक प्रक्रिया और मुकदमे की सुनवाई पर टिकी हुई हैं।


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