बांदा, के एस दुबे । यमुना नदी पर बने गलौली-बारा और मड़ौलीकलां-अढ़ावल प्लांटून पुलों को समय से पहले हटाए जाने की तैयारी ने हजारों ग्रामीणों की चिंता बढ़ा दी है।बरसात की आहट के बीच इन पुलों के सहारे रोजमर्रा की जिंदगी जी रहे लोगों को अब अपने आवागमन,बच्चों की पढ़ाई और मरीजों के इलाज की चिंता सताने लगी है।ग्रामीणों की इसी पीड़ा को आवाज देते हुए समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव एवं पूर्व राज्यसभा सांसद विशम्भर प्रसाद निषाद ने जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपकर दोनों पुलों को बरसात तक बनाए रखने की मांग की है।पूर्व सांसद ने कहा कि तहसील पैलानी क्षेत्र के लिए यमुना पर बने ये प्लांटून पुल केवल लोहे और लकड़ी की संरचना नहीं हैं,बल्कि हजारों लोगों की जीवनरेखा हैं।इन पुलों के माध्यम से किसान अपनी उपज बाजार तक पहुंचाते हैं,छात्र स्कूल-कॉलेज जाते हैं और मरीज समय पर अस्पताल पहुंच पाते हैं।यदि बरसात शुरू होने से पहले
ही पुल हटा दिए गए तो क्षेत्र की बड़ी आबादी को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ेगा।क्षेत्र भ्रमण के दौरान ग्रामीणों ने पूर्व सांसद को बताया कि अभी नदी में ऐसी स्थिति नहीं है कि पुलों को तत्काल हटाना पड़े।लोगों का कहना है कि प्रशासन हर वर्ष बरसात का हवाला देकर जल्दबाजी में पुल हटवा देता है, जबकि कई सप्ताह तक लोग वैकल्पिक व्यवस्था के अभाव में परेशान होते रहते हैं।ग्रामीणों ने मांग की कि जब तक वास्तविक बाढ़ की स्थिति न बन जाए,तब तक दोनों पुलों को चालू रखा जाए।ज्ञापन में पूर्व सांसद ने जिलाधिकारी से जनभावनाओं का सम्मान करते हुए गलौली-बारा प्लांटून पुल और मड़ौलीकलां-अढ़ावल प्लांटून पुल को बरसात के मौसम तक यथावत बनाए रखने का आग्रह किया है।उन्होंने कहा कि पुल हटाने का फैसला केवल प्रशासनिक नहीं बल्कि लाखों कदमों की रोजमर्रा की जरूरतों से जुड़ा विषय है।ऐसे में किसी भी निर्णय से पहले ग्रामीणों की समस्याओं और जनहित को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जानी चाहिए।ग्रामीणों का कहना है कि यदि पुल हटा दिए गए तो उन्हें कई किलोमीटर अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ेगी।इसका सबसे ज्यादा असर छात्रों, बुजुर्गों,गर्भवती महिलाओं और जरूरतमंद मरीजों पर पड़ेगा।अब क्षेत्र की जनता प्रशासन से संवेदनशील निर्णय की उम्मीद लगाए बैठी है।


No comments:
Post a Comment