चित्रकूट, सुखेन्द्र अग्रहरि : कामदगिरि परिक्रमा मार्ग स्थित भागवत पीठ में चल रही श्री शिव महापुराण कथा के चतुर्थ दिवस श्रद्धालुओं ने बड़ी संख्या में पहुंचकर कथा श्रवण किया। श्रीधाम वृंदावन से पधारे कथा व्यास सुमेधानंद महाराज ने भगवान शिव के निराकार और साकार स्वरूप का वर्णन करते हुए कहा कि शिव के दो रूप हैं निष्कल और सकल। उन्होंने बताया कि पंचाक्षर मंत्र ’’‘ॐ नमः शिवाय‘’’ स्वयं भगवान शिव से प्रकट हुआ है और यही मंत्र जीव को शिव तत्व से जोड़ने का माध्यम है।
कथाव्यास ने कहा कि मानव शरीर पंचमहाभूत पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु और आकाश से निर्मित है। मृत्यु के समय यही पांचों तत्व अपने मूल स्वरूप में विलीन हो जाते हैं, जिसे मृत्यु कहा जाता है। उन्होंने कहा कि समस्त सृष्टि में शिव तत्व व्याप्त है और भगवान शिव संपूर्ण सृष्टि के गुरु हैं। जब शरीर से शिव तत्व निकल जाता है, तब वह केवल शव रह जाता है। कथा व्यास ने काशी विश्वनाथ सहित द्वादश ज्योतिर्लिंगों की महिमा का वर्णन किया। साथ ही चित्रकूट की महत्ता बताते हुए इसे ब्रह्मांड का सबसे बड़ा तीर्थ बताया। अंत में विधि-विधान से महाआरती संपन्न हुई तथा श्रद्धालुओं में प्रसाद वितरित किया गया। इस मौके पर यजमान पं. रामकिशोर दीक्षित एवं बागेश्वरी देवी, भागवताचार्य आचार्य नवलेश दीक्षित सहित श्रोतागण आदि मौजूद रहे।


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