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Tuesday, October 27, 2026

बाल विवाह व बालश्रम के खिलाफ बताए कानूनी प्रावधान

बाल विवाह कराने पर दो साल तक की सजा व एक लाख रुपये तक जुर्माने का प्रावधान

फतेहपुर, मो शमशाद । ग्रामीण परंपरा विकास संस्थान की ओर से ग्राम सरकी स्थित श्री भजनानंद सरस्वती उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में विवाह मुक्त अभियान के तहत मिशन शक्ति फेज-6.0 के अंतर्गत बाल विवाह और बालश्रम के खिलाफ जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में विद्यार्थियों को बाल विवाह के दुष्परिणामों, बाल श्रम से होने वाले नुकसान और बच्चों की सुरक्षा के लिए बनाए गए कानूनी प्रावधानों की जानकारी दी गई। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि बाल कल्याण समिति के अध्यक्ष एवं मजिस्ट्रेट राजेंद्र प्रसाद साहू ने कहा कि बाल विवाह एक अपराध है। इसके कारण बच्चों की पढ़ाई अधूरी रह जाती है और उनके स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव पड़ता है। कम उम्र में गर्भधारण से मां व शिशु दोनों के जीवन को खतरा हो सकता है। उन्होंने बताया कि बाल विवाह

कार्यक्रम में बाल विवाह व बालश्रम के कानूनी प्रावधान बताते अध्यक्ष राजेन्द्र प्रसाद साहू।

कराने, उसमें शामिल होने या सहयोग करने वाले लोगों को दो साल तक की कैद और एक लाख रुपये तक के जुर्माने का सामना करना पड़ सकता है। विशिष्ट अतिथि बाल कल्याण समिति के सदस्य एवं मजिस्ट्रेट रामकृष्ण पांडेय ने विद्यार्थियों को बाल विवाह व बालश्रम जैसी सामाजिक कुरीतियों के दुष्परिणामों से अवगत कराया। चाइल्ड लाइन प्रभारी नीरू पाठक ने बच्चों की सहायता के लिए विभिन्न हेल्पलाइन नंबरों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि किसी बच्चे को सहायता की आवश्यकता होने पर चाइल्ड हेल्पलाइन 1098, पुलिस सहायता 112, साइबर अपराध हेल्पलाइन 1930, एंबुलेंस सेवा 108, स्वास्थ्य सेवा 102 और मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076 पर संपर्क किया जा सकता है। कार्यक्रम में चाइल्ड राइट्स एसोसिएट अमन तिवारी, थाना गाजीपुर की मिशन शक्ति प्रभारी उपनिरीक्षक ज्योति कौशिक, एएचटीयू के उपनिरीक्षक हरि नारायण शुक्ला, कांस्टेबल आलोक यादव, विद्यालय प्रबंधक सत्येंद्र कुमार, प्रधानाचार्य छाया यादव सहित विद्यालय के शिक्षक एवं कर्मचारी मौजूद रहे। ग्रामीण परंपरा विकास संस्थान के सदस्य सुधांशु द्विवेदी व आशुतोष मोदनवाल उर्फ सोनू मोदनवाल ने भी सहभागिता की। संचालन ग्रामीण परंपरा विकास संस्थान के जिला समन्वयक पुष्पेंद्र कुमार ने किया। समापन पर विद्यालय प्रबंधक सत्येंद्र कुमार ने कहा कि बच्चों को जागरूक करने के लिए विद्यालय में समय-समय पर ऐसे कार्यक्रम आयोजित किए जाने चाहिए, ताकि वे अपने अधिकारों और सुरक्षा के प्रति सजग रह सकें।


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